
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर तीखा हमला किया और सवाल उठाया कि यदि आप योगी हैं, तो मुख्यमंत्री पद पर क्यों हैं? उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शंकराचार्य बनने के लिए किसी सरकारी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।
उन्होंने बताया कि पिछले माघ मेले में प्रदेश की कथित हिंदू सरकार ने अपने गेरुआधारी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उनसे 24 घंटे में शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगने का दुस्साहस किया, जिसे स्वामी ने तय समय सीमा में प्रस्तुत कर दिया। इसके बाद उन्होंने सरकार को उनके असली हिंदू होने का प्रमाण देने के लिए 40 दिन का समय दिया, जिसमें से 9 फरवरी तक केवल 10 दिन बीत चुके हैं।
स्वामी ने कहा कि इन 10 दिनों में सरकार और मुख्यमंत्री ने अपने असली हिंदू होने का कोई प्रमाण नहीं दिया। इसके बजाय उनके आचरण ने नकली हिंदू होने के संकेत दिए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने पशुपालन मंत्री को एक लेख पढ़ने के लिए दिया, जिसमें कहा गया कि उत्तर प्रदेश सरकार गाय नहीं बल्कि भैंस, बकरा और सुअर कटवाती है। स्वामी ने इसे असली हिंदू और संतों के लिए लज्जास्पद बताया।
स्वामी ने आगे कहा कि शंकराचार्य बनने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की मान्यता का कोई महत्व नहीं है। जो व्यक्ति स्वयं को हिंदू कहता है लेकिन शंकराचार्य का सम्मान नहीं करता, वह अपने आप में नकली हिंदू सिद्ध होता है। उन्होंने आदि शंकराचार्य के मठाम्नाय महानुशासन का हवाला देते हुए कहा कि धर्म ही मनुष्य का मूल है और आचार्य पर आधारित होता है।
केंद्रीय बजट 2026 का जिक्र करते हुए स्वामी ने कहा कि इसे 'ऐतिहासिक' बताया गया है, क्योंकि इसमें मांस निर्यातकों को अतिरिक्त ड्यूटी-फ्री छूट दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जीव-हिंसा को बढ़ावा देने वाला बजट असली हिंदू और धर्म के दृष्टिकोण से 'ऐतिहासिक विकास' कहलाया जा सकता है?
स्वामी ने कहा कि 10 दिन के लेखा-जोखा में सुधार नहीं बल्कि संहार ही दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि सच्चा धर्म शांति और संतोष का माध्यम है, लेकिन आज इसे सत्ता और संपत्ति का औजार बना दिया गया है।
उन्होंने बताया कि कुछ लोग कह रहे हैं कि योगी सरकार ने नया कुछ नहीं किया, लेकिन आंकड़े अलग कहानी बताते हैं। 2017 में योगी के मुख्यमंत्री बनने से पहले उत्तर प्रदेश में कुल मांस उत्पादन लगभग 7.5 लाख टन था, जो अब 13 लाख टन के पार पहुँच गया है।
स्वामी ने चेतावनी दी कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 16 करोड़ से अधिक निरपराध जीवों की हत्या की गई है। यह वही संहार है जिसे 'वैध' और 'आधुनिक' वधशालाओं के माध्यम से सरकारी संरक्षण प्राप्त है। स्वामी ने सवाल किया कि क्या यही हिंदुत्व है? क्या इसे संतत्व या महंतत्व कहा जा सकता है? उनका निष्कर्ष साफ था कि यह शासन हिंदूवादी मुखौटे के पीछे केवल वोट के लिए गौ-भक्ति का प्रदर्शन करता है, जबकि राजस्व के लिए वधशालाओं को बढ़ावा दे रहा है।














