प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को लगातार दूसरे झटके का सामना करना पड़ा। वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी (सपा) के लाल बिहारी यादव पहले ही जीत दर्ज कर चुके हैं। वहीं, वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने बीजेपी के केदारनाथ सिंह के मुकाबले निर्णायक बढ़त बना ली। इस बीच भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने अपनी हार स्वीकार करते हुए मतदाताओं का आभार जताया।
गुरुवार, 29 अक्टूबर को मतगणना के तीसरे दिन भी स्नातक सीट के अंतिम परिणाम का इंतजार जारी रहा। प्रथम वरीयता के मतों की नौवें चक्र तक हुई गिनती में आशुतोष सिन्हा को 50,462 वोट मिले, जबकि केदारनाथ सिंह को 33,478 वोट प्राप्त हुए। इस तरह सपा प्रत्याशी 16,984 मतों से आगे चल रहे थे। दूसरी वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने के बाद ही इस सीट का अंतिम परिणाम स्पष्ट होना था।
वाराणसी में दोनों प्रमुख एमएलसी सीटों पर सपा के प्रदर्शन को बीजेपी के लिए राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इन चुनावों के नतीजों को पूरे वाराणसी के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि ये निर्वाचन क्षेत्र विशेष मतदाता समूहों से जुड़े हैं।
केदारनाथ सिंह ने स्वीकार किया जनादेश, मतदाताओं का जताया आभार
बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा कर चुनाव में मिले जनादेश को स्वीकार करने की बात कही। उन्होंने माना कि इस बार उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। उनके संदेश से संकेत मिला कि वह चुनावी परिणाम को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हुए स्वीकार कर रहे हैं।
केदारनाथ सिंह ने वाराणसी खंड के उन सभी स्नातक मतदाताओं के प्रति आभार जताया, जिन्होंने उन्हें समर्थन दिया और उन पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मतदाताओं का स्नेह उनके लिए अमूल्य है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में जनता के फैसले का सम्मान करना आवश्यक है और जनादेश को लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने राजनीति को केवल सत्ता या पद हासिल करने का माध्यम मानने के बजाय समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने और जनसेवा करने का प्रयास बताया। उनका कहना था कि चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बावजूद समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।
बीजेपी प्रत्याशी ने पार्टी और गठबंधन के वरिष्ठ पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, समर्थकों तथा शुभचिंतकों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने जीत और हार को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा बताते हुए जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखने की बात कही।
आशुतोष सिन्हा ने 16,984 वोटों की बढ़त बनाई
वाराणसी खंड स्नातक एमएलसी सीट पर मतगणना के दौरान सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा लगातार बढ़त बनाए हुए थे। 29 अक्टूबर की सुबह उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्रथम वरीयता के मतों की नौवें चक्र तक गिनती में उन्हें 50,462 वोट मिले थे। बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह के खाते में 33,478 वोट आए थे। दोनों उम्मीदवारों के बीच मतों का अंतर 16,984 था। इससे पहले आठवें चक्र तक आशुतोष सिन्हा को 47,450 मत और केदारनाथ सिंह को 31,189 मत मिले थे। उस समय सपा प्रत्याशी 16,261 वोटों से आगे थे। नौवें चक्र की गिनती के बाद उनकी बढ़त और बढ़ गई।
लगातार बढ़ती बढ़त से सपा समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया। मतगणना स्थल के बाहर पार्टी कार्यकर्ता अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आए। दूसरी ओर, बीजेपी खेमे में मायूसी का माहौल बताया गया।
हालांकि, प्रथम वरीयता के मतों की गिनती में बड़ी बढ़त हासिल कर लेने के बावजूद आशुतोष सिन्हा को तत्काल विजेता घोषित नहीं किया गया। इसकी वजह यह थी कि चुनाव में जीत के लिए निर्धारित मतों का कोटा हासिल करने की प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी थी। इसके लिए दूसरी वरीयता के मतों की गणना की जा रही थी।
27 अक्टूबर से जारी मतगणना में क्यों हुई देरी?
वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए मतगणना 27 अक्टूबर से शुरू हुई थी। सामान्य चुनावों की तुलना में इस सीट पर मतों की गिनती की प्रक्रिया लंबी रही। इसके अलावा, मतगणना के दौरान उठी आपत्तियों और विवादों के कारण भी अंतिम नतीजे आने में देरी हुई।
मतगणना के पांचवें चक्र के दौरान बीजेपी प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने गिनती की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। बीजेपी पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि संबंधित चरण में मतों की गणना के समय उसका एजेंट मौजूद नहीं था। इसी आधार पर दोबारा गिनती कराने की मांग की गई।
इस विवाद के बाद बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मतगणना स्थल पर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी पक्ष ने प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और पुनर्गणना की मांग उठाई। इसके बाद दोबारा गिनती कराने का आश्वासन मिलने की खबर सामने आई।
पांचवें चक्र की मतगणना के दौरान पैदा हुए विवाद के चलते प्रक्रिया कुछ समय के लिए प्रभावित हुई। बाद में मतगणना दोबारा शुरू की गई और अगले चक्रों के नतीजे सामने आए। इसी बीच सपा प्रत्याशी अपनी बढ़त बढ़ाते रहे। मतगणना में अनियमितताओं को लेकर बीजेपी की ओर से लगाए गए आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये आरोप चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियां थीं। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी और अंतिम परिणाम को आधार बनाना जरूरी है।
दूसरी वरीयता के मतों से तय होना था अंतिम परिणाम
वाराणसी खंड स्नातक सीट पर मतगणना की प्रक्रिया सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनावों से अलग होती है। इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के क्रम में वरीयता देते हैं। इसलिए केवल प्रथम वरीयता के मतों के आधार पर हर स्थिति में अंतिम परिणाम घोषित नहीं किया जा सकता।
यदि किसी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के मतों के आधार पर जीत के लिए निर्धारित कोटा नहीं मिलता, तो नियमानुसार अगली वरीयता के मतों की गणना की जाती है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह निर्धारित करना होता है कि निर्धारित नियमों के अनुसार कौन-सा उम्मीदवार जीत के लिए आवश्यक मत हासिल करता है।
वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में प्रथम वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने के बाद दूसरी वरीयता के मतों की गणना शुरू की गई। इसी कारण नौवें चक्र के आंकड़ों में बड़ी बढ़त होने के बावजूद तत्काल अंतिम नतीजा घोषित नहीं हुआ।
आशुतोष सिन्हा की 16,984 मतों की बढ़त ने सपा समर्थकों की उम्मीदें मजबूत कर दी थीं। मतगणना स्थल के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह था, जबकि बीजेपी खेमे में निराशा की स्थिति बताई गई। फिर भी चुनावी प्रक्रिया की औपचारिक पूर्णता के लिए दूसरी वरीयता के मतों की गणना और आधिकारिक परिणाम की घोषणा जरूरी थी।
वाराणसी शिक्षक एमएलसी सीट पर लाल बिहारी यादव की जीत
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आशुतोष सिन्हा की बढ़त से पहले वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी। सपा के लाल बिहारी यादव ने इस सीट पर जीत दर्ज कर पार्टी को पहले ही सफलता दिला दी थी। इस तरह वाराणसी की शिक्षक और स्नातक, दोनों एमएलसी सीटों पर सपा का प्रदर्शन चर्चा में रहा। शिक्षक सीट का परिणाम घोषित हो चुका था, जबकि स्नातक सीट पर मतगणना की प्रक्रिया जारी थी और आशुतोष सिन्हा निर्णायक बढ़त बनाए हुए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में सपा की इन दोनों सीटों पर मजबूत स्थिति को पार्टी के लिए अहम राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा था। हालांकि, स्नातक सीट पर अंतिम आधिकारिक परिणाम की घोषणा तक आशुतोष सिन्हा की बढ़त और घोषित जीत के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी था।














