उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए विधान परिषद के 11 एमएलसी सीटों के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की है। भारतीय जनता पार्टी के खाते में छह सीटें गई हैं। इस नतीजे के बाद विधान परिषद में सपा की सदस्य संख्या 10 से बढ़कर 12 हो गई है। इससे पार्टी को नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए जरूरी संख्या के लिहाज से मजबूती मिली है।
इन चुनावों को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक ताकत की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था। भाजपा ने अपनी छह सीटें बरकरार रखीं, जबकि सपा ने पिछली बार के मुकाबले दो सीटें अधिक हासिल कीं। पार्टी ने वाराणसी की स्नातक और शिक्षक, दोनों सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा लखनऊ की स्नातक सीट भाजपा से छीन ली और आगरा शिक्षक सीट पर भी कब्जा जमाया। यह सीट पिछले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के पास थी।|
विधान परिषद में सपा की संख्या बढ़कर 12 हुई
11 सीटों के नतीजों के बाद सपा की विधान परिषद में सदस्य संख्या 12 हो गई है। चुनाव से पहले पार्टी के 10 सदस्य थे। नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए सदन में कम से कम 10 सदस्यों की संख्या को जरूरी माना जाता है। ऐसे में चुनावी नतीजों ने सपा को इस लिहाज से मजबूत स्थिति में पहुंचाया है। हालांकि, केवल संख्या बढ़ने से नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति अपने-आप नहीं होती। इस पद के लिए विधान परिषद के सभापति की मान्यता भी जरूरी है। परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर फिलहाल मोहम्मद जासमीर अंसारी नेता प्रतिपक्ष के रूप में दर्ज हैं। इसलिए पांच सीटों की जीत को सपा की सदन में बढ़ी ताकत और अपनी स्थिति मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है।
लखनऊ में कांति सिंह ने भाजपा से छीनी स्नातक सीट
सपा की सबसे अहम जीत लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में हुई। यहां पार्टी की उम्मीदवार कांति सिंह ने भाजपा के अवनीश कुमार सिंह को 17,127 वोटों से हराया। अंतिम नतीजों में कांति सिंह को 56,905 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में 39,778 मत पड़े।
यह भाजपा के लिए बड़ा झटका इसलिए भी रहा, क्योंकि अवनीश कुमार सिंह इस सीट से मौजूदा एमएलसी थे। कांति सिंह ने पिछली बार भी इस सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार उन्होंने भाजपा के मौजूदा सदस्य को हराकर सीट सपा के खाते में डाल दी।
आगरा शिक्षक सीट पर आकाश अग्रवाल की जीत
सपा को दूसरी महत्वपूर्ण कामयाबी आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मिली। यहां पार्टी के उम्मीदवार डॉ. आकाश अग्रवाल ने भाजपा के हरि किशोर तिवारी को 4,263 मतों से पराजित किया। आकाश अग्रवाल को कुल 14,046 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 9,783 मत प्राप्त हुए। यह सीट पिछले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के पास थी। इस बार सपा ने यहां जीत दर्ज कर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की। इस तरह पार्टी ने लखनऊ स्नातक सीट भाजपा से छीनी और आगरा शिक्षक सीट पर भी जीत हासिल की।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की पांच सीटों में सपा को तीन पर जीत
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सपा का प्रदर्शन भाजपा से बेहतर रहा। कुल पांच सीटों में से तीन पर सपा और दो पर भाजपा ने जीत दर्ज की। लखनऊ के अलावा सपा ने इलाहाबाद-झांसी और वाराणसी स्नातक सीट पर भी जीत हासिल की। इलाहाबाद-झांसी से डॉ. मान सिंह यादव ने भाजपा के अशोक कुमार राठौर को 27,663 वोटों से हराया। इस चुनाव में यह 11 सीटों के बीच जीत का सबसे बड़ा अंतर रहा। वाराणसी स्नातक सीट पर सपा के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह को पराजित किया। आशुतोष सिन्हा को 55,046 वोट मिले, जबकि केदारनाथ सिंह को 35,114 मत प्राप्त हुए। इस तरह सपा ने वाराणसी की दोनों सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखा। वहीं, भाजपा ने स्नातक वर्ग की आगरा और मेरठ सीटों पर जीत दर्ज की। आगरा से डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह और मेरठ से दिनेश कुमार गोयल विजयी रहे।
शिक्षक सीटों पर भाजपा का दबदबा कायम
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा ने अपनी पकड़ बनाए रखी। छह सीटों में से चार पर भाजपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि दो सीटें सपा के खाते में गईं। भाजपा के उमेश द्विवेदी ने लखनऊ शिक्षक सीट पर जीत हासिल की। मेरठ से श्रीचंद शर्मा, बरेली-मुरादाबाद से डॉ. हरि सिंह ढिल्लों और गोरखपुर-फैजाबाद से ध्रुव कुमार त्रिपाठी विजयी रहे। गोरखपुर-फैजाबाद में ध्रुव कुमार त्रिपाठी और निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। त्रिपाठी ने 16,790 वोट हासिल किए, जबकि राजीव यादव को 14,580 मत मिले। दूसरी ओर, सपा ने वाराणसी शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव की जीत के साथ अपना कब्जा बरकरार रखा। आगरा शिक्षक सीट पर आकाश अग्रवाल की जीत से पार्टी को दूसरी सफलता मिली। इस तरह शिक्षक वर्ग में भाजपा चार और सपा दो सीटें जीतने में सफल रही।
2020 के चुनाव के मुकाबले सपा को मिली दो सीटों की बढ़त
पिछले एमएलसी चुनाव यानी 2020 में भाजपा ने छह सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि सपा के खाते में तीन सीटें आई थीं। बाकी दो सीटों पर निर्दलीय और शिक्षक दल के उम्मीदवार विजयी हुए थे। इस बार भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज कर अपना आंकड़ा कायम रखा, जबकि सपा ने तीन से बढ़कर पांच सीटें हासिल कर लीं। इस चुनाव में भाजपा को लखनऊ स्नातक सीट गंवानी पड़ी। वहीं, सपा ने आगरा शिक्षक सीट पर जीत दर्ज कर अपनी संख्या में इजाफा किया। वाराणसी की दोनों सीटें और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट जीतकर पार्टी ने अपना प्रदर्शन भी मजबूत किया।
अखिलेश यादव ने शिक्षकों, छात्रों और बेरोजगार युवाओं का मुद्दा उठाया
चुनाव नतीजों के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे भाजपा सरकार की शिक्षा और शिक्षक संबंधी नीतियों के खिलाफ जनादेश बताया। उनका कहना था कि शिक्षकों, छात्रों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने सरकार के कामकाज पर अपना फैसला सुनाया है। उन्होंने शिक्षित बेरोजगार स्नातकों की नाराजगी का भी जिक्र किया। अखिलेश यादव के मुताबिक, इन नतीजों से विधानसभा चुनाव से पहले सपा का मनोबल बढ़ेगा। पार्टी के लिए खास तौर पर लखनऊ और वाराणसी में मिली जीत राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। अखिलेश यादव जल्द ही वाराणसी का दौरा भी कर सकते हैं।
अखिलेश यादव ने चुनाव में हेरफेर का लगाया आरोप
सपा अध्यक्ष ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए भाजपा पर हेरफेर का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी का कोई भी उम्मीदवार वास्तव में नहीं हारा है, बल्कि भाजपा की कथित हेरफेर के कारण कुछ उम्मीदवार जीत का प्रमाणपत्र हासिल नहीं कर सके। अखिलेश ने कहा कि पार्टी ऐसे उम्मीदवारों को भी विजेता मानती है, जिन्हें प्रमाणपत्र नहीं मिला। यह अखिलेश यादव का राजनीतिक आरोप है। चुनावी नतीजों में भाजपा ने छह और सपा ने पांच सीटें जीती हैं। ऐसे में उनके दावे को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।














