
उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले में स्थित कैंची धाम आश्रम आज आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है। हर दिन हज़ारों श्रद्धालु यहाँ नीम करोली बाबा के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। बाबा को हनुमान जी का परम भक्त माना जाता है और कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में सौ से भी अधिक हनुमान मंदिरों का निर्माण करवाया। यही कारण है कि उनके अनुयायी उन्हें कलियुग में हनुमान जी का स्वरूप या अवतार मानते हैं।
लेकिन क्या सच में नीम करोली बाबा को हनुमान जी का अवतार कहना उचित है? इस सवाल का जवाब हाल ही में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एक पॉडकास्ट के दौरान दिया।
अवतार मानना श्रद्धा का विषय – रामभद्राचार्य
शुभांकर मिश्रा द्वारा पूछे गए प्रश्न पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने स्पष्ट कहा कि ऐसे संतों पर प्रत्यक्ष टिप्पणी करना वह उचित नहीं मानते, क्योंकि यह पूर्णत: श्रद्धा और विश्वास का विषय है। उन्होंने समझाया – “हनुमान जी को अब अवतार लेने की आवश्यकता नहीं है। तुलसीदास जी ने लिखा है – चारों जुग परताप तुम्हारा। यानी हनुमान जी सभी युगों में विद्यमान हैं। समर्थ गुरु रामदास पर भी हनुमान जी की विशेष कृपा थी, उसी प्रकार नीम करोली बाबा पर भी उनकी अनुकंपा रही। उन्हें अवतार कहना थोड़ा अतिशयोक्ति होगा।”
हनुमान जी के पराक्रम का उल्लेख
रामभद्राचार्य ने हनुमान जी के अद्भुत पराक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने तीन-तीन राजाओं की रक्षा की। सबसे पहले किष्किन्धा का राज्य सुग्रीव को दिलाया, फिर लंका युद्ध में राम की विजय सुनिश्चित की और अंत में भरत के प्राण बचाकर अयोध्या का राज भी सुरक्षित रखा। उन्होंने कहा कि जब अयोध्या में रामलला का आगमन हो गया, तो हनुमान जी का ध्येय पूर्ण हुआ और उनकी उपस्थिति हर युग में वैसे ही बनी रही।
हिंदू राष्ट्र पर विचार
वार्ता के दौरान जब उनसे पूछा गया कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करना संभव है या नहीं, तब रामभद्राचार्य ने कहा – “यह काम आसान नहीं है। सबसे पहले तीन-चौथाई संसद में बहुमत होना चाहिए, तभी संविधान में बड़े बदलाव संभव होंगे। अभी यह कठिन लगता है, लेकिन प्रभु की इच्छा से असंभव भी संभव हो सकता है। यदि ऐसा हुआ तो यह मेरे लिए हर्ष का विषय होगा और मैं यही प्रयास करूंगा कि हिंदुओं की संख्या में वृद्धि हो।”














