
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सोमवार (11 अगस्त 2025) की सुबह एक सदियों पुराने मकबरे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। हिंदू संगठनों के सदस्यों ने दावा किया कि यह मकबरा दरअसल एक प्राचीन मंदिर के अवशेषों पर बना है और प्रशासन से वहां पूजा करने की अनुमति की मांग की। इसी बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
ओवैसी का आरोप — ‘अगर हमलावर मुसलमान होते…’
ओवैसी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों से जुड़े किसी भी ऐतिहासिक स्थल पर दावा करने की खुली छूट दी जा रही है और यह सब राज्य पुलिस की मौजूदगी में हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस निष्क्रिय है और कार्रवाई नहीं कर रही। उनका कहना था, “अगर यही हरकत मुसलमानों ने की होती, तो नतीजे कुछ और होते। भाजपा ने देश में नफरत का माहौल पैदा कर दिया है।” ओवैसी ने आगे कहा कि कानून का इस्तेमाल अब राजनीतिक विचारधारा और धार्मिक दबाव के तहत हो रहा है, जो मुसलमानों को निशाना बनाने और उन्हें हाशिए पर धकेलने का उदाहरण है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना 1992 के हालात से की।
हिंदू संगठनों का दावा और प्रदर्शन
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का दावा है कि नवाब अबू समद का मकबरा वास्तव में ‘ठाकुर जी’ के प्राचीन मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। उनका कहना है कि समाधि के अंदर मौजूद शिवलिंग इस बात का सबूत है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग ढांचे के पास भगवा झंडा फहराते हुए और कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ करते हुए नजर आ रहे हैं।
BJP नेता की चेतावनी और प्रशासन की कार्रवाई
भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष मुखलाल पाल ने पहले ही जिला प्रशासन को चेताया था कि वह 11 अगस्त को हिंदू संगठनों के साथ मिलकर उस स्थल पर पूजा-अर्चना करेंगे। उनका दावा था कि यह स्थान सदियों पहले ठाकुर जी का मंदिर था, जिसे आक्रमणकारियों ने मकबरे में बदल दिया। प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए — स्थल को सील कर दिया गया, चारों तरफ बैरिकेडिंग लगाई गई और किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई। सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ा दी गई ताकि हालात नियंत्रण में रहें।
तनावपूर्ण माहौल और बढ़ते सवाल
यह घटना न केवल फतेहपुर, बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या ऐतिहासिक ढांचों को लेकर इस तरह के दावे और प्रदर्शन भविष्य में और विवाद भड़का सकते हैं। वहीं, प्रशासन पर भी यह दबाव है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखे और किसी भी पक्ष को हिंसक कदम उठाने से रोके।














