राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों को लेकर जारी विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने करीबी लोगों के सामने भावुक प्रतिक्रिया दी है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि वह किसी भी तरह का कलंक लेकर अयोध्या से नहीं जाएंगे। चढ़ावा मामले में लगातार उठ रहे सवालों के बीच चंपत राय फिलहाल सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दे रहे हैं और एकांत में रहकर विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद वह इस पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रख सकते हैं।
करीबी लोगों से बातचीत के दौरान चंपत राय ने कहा कि उन्होंने अयोध्या में अपनी जिम्मेदारी निभाई है और भगवान राम का भव्य मंदिर भी बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन वह अपने ऊपर लगे आरोपों का दाग लेकर यहां से नहीं जाएंगे। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि उन्हें टिन्नू यादव से ऐसी उम्मीद बिल्कुल नहीं थी और उनके व्यवहार से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है। बताया जाता है कि तीर्थ क्षेत्र पुरम स्थित जिस साधारण कमरे में चंपत राय रहते हैं, वहां उनके बिस्तर के पास भगवान श्रीराम की एक प्रतिमा रखी हुई है। जब उनके साथ मौजूद लोगों ने आरोपों के बाद उनके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को लेकर चिंता जताई, तो उन्होंने भगवान राम की प्रतिमा की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें किसी बात की चिंता नहीं है। उनका कहना था कि यदि ये आरोप लगवाए गए हैं, तो इन्हें हटाने का रास्ता भी भगवान ही दिखाएंगे।
इधर, इस पूरे विवाद के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले उन्हें श्रीराम मंदिर से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी। शुरुआत में उन्हें उस जानकारी पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन पिछले कुछ दिनों में उन्होंने उसकी पुष्टि कराई और अब उनका दावा है कि वह जानकारी सही साबित हुई है। केजरीवाल ने कहा कि वह इस विषय से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा करेंगे।
वहीं, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि चढ़ावे में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो इसमें केवल चंपत राय का नाम लेना उचित नहीं होगा। उनका कहना था कि इस पूरे मामले में कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय नेताजी मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। आंदोलन के दौरान देशभर में राम मंदिर के लिए ईंटों की पूजा कराई गई थी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी उस आंदोलन के पक्ष में नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद उनके घर भी चंदा लेने लोग आए थे और उन्होंने भी उस समय सहयोग राशि दी थी। रामगोपाल यादव ने दावा किया कि उस चंदे का कोई स्पष्ट हिसाब-किताब आज तक सामने नहीं आया है।













