
सोमवार का दिन आगरा के ताजमहल क्षेत्र में अचानक दहशत का कारण बन गया, जब यलो जोन बैरियर के पास अचानक गोलियों की आवाज़ गूंजी। वहां मौजूद लोगों की सांसें थम गईं और माहौल में अफरा-तफरी फैल गई। यह फायरिंग किसी असामाजिक तत्व ने नहीं, बल्कि आजमगढ़ के एक भाजपा नेता और एलआईसी एजेंट पंकज कुमार सिंह ने की थी। पुलिस को चकमा देकर फरार हुए इस आरोपी को आखिरकार लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया गया और फिर आगरा पुलिस को सौंप दिया गया।
‘मन किया तो चला दी गोली’ – आरोपी की चौंकाने वाली सफाई
पूछताछ के दौरान जब पुलिस ने उससे फायरिंग की वजह पूछी, तो पंकज का जवाब बेहद गैरजिम्मेदाराना और चौंकाने वाला था – "मन किया तो चला दी गोली।" यह सुनकर पुलिस अफसरों के भी होश उड़ गए। एक संवेदनशील पर्यटन स्थल के पास इस तरह की हरकत को गंभीरता से लिया गया है।
क्या था पूरा मामला?
सुबह करीब 9:15 बजे पंकज अपनी अर्टिगा कार से ताजमहल के पश्चिमी गेट पर पहुंचा। बलरामपुर, आजमगढ़ निवासी पंकज ने खुद को भारत सरकार का अधिकारी बताते हुए ताज परिसर में वाहन ले जाने की ज़िद की, लेकिन तैनात सुरक्षाकर्मियों ने नियमों का हवाला देते हुए उसे रोका। इसी बात से नाराज़ होकर उसने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से तीन राउंड हवाई फायर किए। इस हरकत से वहां मौजूद लोग घबरा गए और पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
फायरिंग के बाद फरार हो गया आरोपी
पुलिस के वहां पहुंचने से पहले ही पंकज मौके से भाग निकला। उसने दूसरी कार का सहारा लिया और दिशा बदलकर खुद को पुलिस की पकड़ से दूर रखने की कोशिश की। हालांकि, सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस ने उस कार की पहचान की और फिर वृंदावन के एक टैक्सी चालक तक पहुंची, जिसने उसकी मदद की थी।
गिरफ्तारी कैसे हुई?
टैक्सी चालक से मिली जानकारी के आधार पर आगरा पुलिस ने लखनऊ पुलिस की मदद ली और सिर्फ सात घंटे के भीतर उसे मानक नगर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। देर रात उसे आगरा लाया गया।
FIR और पूछताछ में नए मोड़
सिटी डीसीपी सोनम कुमार के मुताबिक, ताज की सुरक्षा में तैनात सब इंस्पेक्टर राजन सिंह की तहरीर पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। बाद में पंकज सिंह की पहचान होने पर उसे प्रमुख आरोपी बनाया गया। जब उससे दोबारा पूछताछ हुई तो उसने कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया – बस यही कहा कि मन किया, इसलिए गोली चला दी।
टैक्सी चालक की भूमिका भी संदेह के घेरे में
टैक्सी चालक नंदलाल को भी आरोपी बनाया गया है। उस पर आरोप है कि उसने पुलिस को फायरिंग की जानकारी नहीं दी और आरोपी को ऐसी जगह तक पहुंचाया जहां से वह आसानी से फरार हो सके। उसके खिलाफ भी पुलिस से अभद्रता करने और आरोपी की मदद करने के आरोप में केस दर्ज किया गया है।
मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल
इस घटना के बाद आरोपी की मानसिक स्थिति पर भी सवाल उठ रहे हैं। पंकज के परिवार ने दावा किया है कि वह मानसिक रूप से बीमार है और 2003 में लखनऊ के नूर मंजिल अस्पताल में उसका इलाज भी हुआ था। हालांकि, पुलिस को वर्तमान में उसकी मानसिक स्थिति का कोई प्रमाण नहीं मिला है।














