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अलीगंज अग्निकांड के बाद प्रशासन का कड़ा रुख, एलडीए बोला- खुद ध्वस्त करें बिल्डिंग, नहीं तो हम गिराएंगे

अलीगंज अग्निकांड के बाद एलडीए ने विवादित इमारत को लेकर बड़ा कदम उठाया है। भवन मालिकों को स्वयं निर्माण ध्वस्त करने का आदेश दिया गया है। जांच में अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और फायर सेफ्टी में गंभीर खामियां सामने आई हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 23 Jun 2026 11:43:08

अलीगंज अग्निकांड के बाद प्रशासन का कड़ा रुख, एलडीए बोला- खुद ध्वस्त करें बिल्डिंग, नहीं तो हम गिराएंगे

लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। हादसे से जुड़ी विवादित इमारत को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया है। प्राधिकरण ने भवन मालिकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर स्वयं भवन को गिरा दें, अन्यथा एलडीए अपने स्तर पर कार्रवाई करते हुए पूरे निर्माण को जमींदोज कर देगा और इसका खर्च भी संबंधित पक्षों से वसूला जाएगा।

इस कार्रवाई के साथ ही उस इमारत में सामने आईं गंभीर अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी पर भी सवाल उठने लगे हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि जिस इलाके में यह भवन बनाया गया था, वह पूरी तरह आवासीय श्रेणी में आता है। नियमानुसार वहां केवल आवासीय उपयोग के लिए मकान बनाए जा सकते हैं, जबकि व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद भवन का इस्तेमाल विभिन्न कमर्शियल गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

जानकारी के अनुसार अलीगंज सेक्टर-डी स्थित इस भूखंड का आवासीय नक्शा वर्ष 2014 में स्वीकृत किया गया था। इससे पहले वर्ष 2013 में वीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला ने इस प्लॉट को खरीदा था और आवासीय भवन निर्माण की अनुमति प्राप्त की थी। हालांकि बाद में वहां आवासीय भवन की जगह व्यावसायिक परिसर विकसित कर दिया गया, जो स्वीकृत मानचित्र और नियमों के विपरीत था।

करीब 1992 वर्गफुट क्षेत्रफल वाले इस प्लॉट पर निर्माण के दौरान एलडीए के कई महत्वपूर्ण मानकों की अनदेखी की गई। नियमों के मुताबिक भवन निर्माण में आगे और पीछे कम से कम तीन-तीन मीटर का सेटबैक छोड़ना अनिवार्य होता है, ताकि आपात स्थिति में पर्याप्त खुला स्थान उपलब्ध रह सके। इसके अलावा भवन के बीच में खुला आंगन या वेंटिलेशन स्पेस भी आवश्यक माना जाता है। जांच में पाया गया कि इन प्रावधानों का उचित पालन नहीं किया गया।

सुरक्षा मानकों को लेकर भी गंभीर खामियां सामने आई हैं। किसी भी व्यावसायिक भवन में लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए कम से कम दो निकास मार्ग होना जरूरी माना जाता है, लेकिन इस इमारत में केवल एक ही प्रवेश और निकास मार्ग उपलब्ध था। स्थिति और चिंताजनक तब हो जाती है जब पता चलता है कि उसी रास्ते में एयर कंडीशनर की बाहरी यूनिटें भी लगाई गई थीं, जिससे आपातकालीन निकासी और अधिक कठिन हो सकती थी।

इन अनियमितताओं के चलते वर्ष 2016 में इस भवन को अवैध घोषित कर दिया गया था और इसके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। हालांकि कुछ समय बाद प्रशासनिक स्तर पर स्थिति बदल गई और भवन को कागजी प्रक्रियाओं के माध्यम से वैधता मिल गई। अब अग्निकांड के बाद एक बार फिर उस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि भवन में विद्युत सुरक्षा को लेकर पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई थी। आरोप हैं कि बिजली के कार्यों में मानकों के अनुरूप गुणवत्ता वाले उपकरणों और वायरिंग का उपयोग नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाहियां किसी भी इमारत में आग लगने के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

जिस एनीमेशन सेंटर में बड़ी संख्या में छात्र और कर्मचारी मौजूद थे, वहां प्रवेश और निकास के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लगाया गया था। बताया जा रहा है कि आपात स्थिति के दौरान यह व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई। इसके अलावा भवन की ऊपरी मंजिल पर ताला लगा होने की बात भी सामने आई है, जिससे लोगों के पास बचाव के सीमित विकल्प रह गए।

फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों को लेकर भी कई तथ्य सामने आए हैं। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार 15 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होता है। संबंधित भवन की ऊंचाई 15 मीटर से कम बताई जा रही है, जिसके कारण फायर एनओसी नहीं ली गई थी। हालांकि अब सवाल उठ रहे हैं कि भले ही एनओसी अनिवार्य न रही हो, लेकिन भवन में बुनियादी अग्नि सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

अलीगंज अग्निकांड के बाद प्रशासनिक एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हैं। साथ ही यह भी पड़ताल की जा रही है कि आखिर वर्षों तक नियमों के उल्लंघन के बावजूद यह भवन कैसे संचालित होता रहा। इस घटना ने एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।

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