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मंदिर जाने से पहले जमा करना होगा मोबाइल, तमिलनाडु के 52 मंदिरों में नया नियम लागू

तमिलनाडु के 52 हिंदू मंदिरों में मोबाइल फोन पर रोक लगाई गई है। जानिए नियम लागू करने में VIP संस्कृति, फोन सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन जैसी चुनौतियां।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 03 Sep 2026 3:42:33

मंदिर जाने से पहले जमा करना होगा मोबाइल, तमिलनाडु के 52 मंदिरों में नया नियम लागू

तमिलनाडु में हिंदू मंदिरों से जुड़े नए नियम को लेकर सरकार के सामने अब सिर्फ आदेश जारी करने की नहीं, बल्कि उसे जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू कराने की चुनौती है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार ने 52 बड़े हिंदू मंदिरों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला किया है। इसके तहत श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पहले अपना मोबाइल फोन निर्धारित स्थान पर जमा कराना होगा।

सरकार का कहना है कि मंदिरों के आध्यात्मिक और शांत वातावरण को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। सरकार के मुताबिक मंदिर परिसरों में रील और वीडियो बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति से वहां का माहौल प्रभावित हो रहा था। ऐसे में मोबाइल फोन पर पाबंदी को व्यवस्था सुधारने के एक उपाय के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस फैसले की असली परीक्षा तब होगी जब इसे बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं, खासकर त्योहारों के दौरान उमड़ने वाली भीड़ के बीच लागू किया जाएगा।

VIP के लिए अलग नियम हुआ तो बढ़ सकती है नाराजगी

वरिष्ठ पत्रकार टी आर जवाहर ने इंडिया टुडे में लिखे अपने लेख में इस व्यवस्था को लागू करने से जुड़ी कई व्यावहारिक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया है। उनके अनुसार सबसे बड़ा सवाल मंदिरों में मौजूद VIP संस्कृति को लेकर है।

मंदिरों में आम श्रद्धालुओं के लिए नियम सख्ती से लागू किए जाने और प्रभावशाली लोगों को अलग तरह की सुविधा मिलने की स्थिति में विवाद खड़ा हो सकता है। नेताओं, मंत्रियों, अधिकारियों, फिल्मी सितारों और बड़े दानदाताओं के साथ अक्सर सुरक्षाकर्मी और अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहते हैं। ऐसे में अगर आम श्रद्धालुओं को फोन जमा कराने के लिए कहा जाता है, लेकिन VIP बिना मोबाइल जमा किए मंदिर में प्रवेश करते हैं, तो इससे असंतोष पैदा होने की आशंका जताई गई है।

इसलिए व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए यह जरूरी होगा कि नियम किस पर लागू होता है, इसे लेकर स्पष्टता हो और आम श्रद्धालुओं तथा VIP के बीच अलग-अलग मानक दिखाई न दें।

महंगे फोन की सुरक्षा भी बड़ा सवाल

मोबाइल जमा कराने की व्यवस्था के सामने दूसरी बड़ी चुनौती फोन की सुरक्षा होगी। मौजूदा समय में लोगों के पास हजारों से लेकर एक लाख रुपये या उससे अधिक कीमत वाले स्मार्टफोन भी होते हैं। इन उपकरणों में केवल निजी तस्वीरें और वीडियो ही नहीं, बल्कि बैंकिंग तथा दूसरी महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी भी मौजूद हो सकती है।

ऐसे में त्योहारों के दौरान जब मंदिरों में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे, तब बड़ी संख्या में मोबाइल फोन को सुरक्षित तरीके से जमा करना अपने आप में जटिल प्रक्रिया बन सकती है। इसके साथ ही सही फोन को सही व्यक्ति तक वापस पहुंचाना भी प्रशासन के लिए अहम जिम्मेदारी होगी।

लंबी कतारों की समस्या भी इससे जुड़ सकती है। यदि दर्शन के लिए आने वाले लोगों को पहले मोबाइल जमा कराने और बाद में उसे वापस लेने के लिए अलग-अलग जगहों पर इंतजार करना पड़ा, तो मंदिरों में भीड़ प्रबंधन की चुनौती और बढ़ सकती है।

फोन जमा करने के लिए शुल्क, लेकिन भुगतान भी मोबाइल से


नई व्यवस्था में मोबाइल फोन जमा कराने के लिए 5 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। कुछ स्थानों पर इसके लिए ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी रखी गई है। यही व्यवस्था एक अलग तरह का विरोधाभास पैदा करती है, क्योंकि जिस मोबाइल फोन को मंदिर में प्रवेश से पहले जमा किया जाना है, उसी फोन के जरिए शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है।

ऐसे में प्रशासन के सामने यह सवाल भी रहेगा कि श्रद्धालुओं के लिए भुगतान और फोन जमा करने की प्रक्रिया को किस तरह आसान बनाया जाए। यदि प्रक्रिया बहुत लंबी या जटिल हुई तो इससे दर्शन के लिए आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

रील और यादें बनाने के बीच फर्क समझाना आसान नहीं

मंदिरों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक का एक पहलू श्रद्धालुओं के बदलते व्यवहार से भी जुड़ा है। आज कई लोग धार्मिक स्थलों पर दर्शन के साथ-साथ तस्वीरें, सेल्फी और वीडियो बनाना भी पसंद करते हैं। लंबे समय तक कतार में इंतजार करने के बाद कुछ श्रद्धालु गर्भगृह के आसपास भी मोबाइल से फोटो या वीडियो बनाने की कोशिश करते हैं, जिससे दूसरे लोगों को परेशानी हो सकती है।

लेकिन हर मोबाइल इस्तेमाल को एक ही नजर से देखना भी आसान नहीं होगा। कई परिवार लंबे अंतराल के बाद मंदिर पहुंचते हैं और यात्रा की याद के तौर पर तस्वीरें रखना चाहते हैं। प्रशासन के लिए धार्मिक स्थल पर याद के लिए तस्वीर लेने और सोशल मीडिया के लिए रील बनाने के बीच स्पष्ट अंतर तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सिर्फ मोबाइल हटाने से पूरी व्यवस्था नहीं बदलेगी


टी आर जवाहर के मुताबिक केवल गर्भगृह या मंदिर परिसर को मोबाइल-मुक्त कर देना पर्याप्त नहीं होगा। उनके अनुसार यदि मंदिरों में दूसरी अव्यवस्थाएं बनी रहती हैं तो सिर्फ मोबाइल फोन पर नियंत्रण से मंदिर की पवित्रता या व्यवस्था पूरी तरह सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

उनका तर्क है कि सरकार मोबाइल फोन के इस्तेमाल को नियंत्रित कर सकती है, लेकिन श्रद्धालुओं के भीतर भक्ति की भावना को किसी नियम के जरिए पैदा नहीं किया जा सकता। इसलिए व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो नियम लागू करने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा का भी ध्यान रखे।

इसके लिए मोबाइल जमा करने की प्रक्रिया सुरक्षित, कम खर्च वाली और तेज रखने की जरूरत पर जोर दिया गया है। साथ ही नियम आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ VIP पर भी समान रूप से लागू करने की बात कही गई है। बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन की व्यवस्था तथा नए नियमों की स्पष्ट जानकारी देना भी व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाने में मदद कर सकता है।

इस तरह 52 मंदिरों में लागू किया गया मोबाइल प्रतिबंध सरकार के लिए केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन की परीक्षा भी है। नियम का उद्देश्य मंदिरों के वातावरण को शांत और व्यवस्थित बनाना है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मोबाइल जमा करने से लेकर उसे सुरक्षित लौटाने और सभी श्रद्धालुओं पर समान नियम लागू करने तक पूरी व्यवस्था कितनी सहज और निष्पक्ष रहती है।

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