जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान हरियाणा के साथ हुए यमुना जल समझौते को राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते के लागू होने से विशेष रूप से शेखावाटी सहित राजस्थान के उन इलाकों को बड़ा लाभ मिलेगा, जो लंबे समय से पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के हित में एक ऐतिहासिक फैसला बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों तक राजस्थान की जल संबंधी आवश्यकताओं की अनदेखी होती रही। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और विभिन्न राज्यों में एक ही दल की सरकारें होने के बावजूद पूर्व में इस गंभीर समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने इस दिशा में सक्रिय पहल करते हुए वर्षों से लंबित योजनाओं को आगे बढ़ाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल संसाधनों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में लंबे समय से अटकी पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को गति दी गई है। इसके साथ ही लगभग 24 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न जल परियोजनाओं पर भी तेजी से काम शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन योजनाओं के पूरा होने से प्रदेश में जल उपलब्धता की स्थिति में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
भजनलाल शर्मा ने बताया कि राजस्थान और हरियाणा के बीच जल बंटवारे को लेकर 12 फरवरी 2024 को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसका उद्देश्य राजस्थान को उसके हिस्से का यमुना जल सुनिश्चित करना था। इसके बाद 29 जून 2026 को केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के बीच हुई अहम बैठक में इस दिशा में एक महत्वपूर्ण सहमति बनी, जिससे लंबे समय से लंबित इस मुद्दे के समाधान का रास्ता साफ हुआ।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों के सहयोग और समन्वय से जल वितरण को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया गया, जो राजस्थान के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा।
प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राजस्थान की वर्षों पुरानी जल समस्या को गंभीरता से समझा और उसके समाधान के लिए प्रभावी पहल की। उनके अनुसार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ही इस लंबे समय से लंबित विषय पर ठोस प्रगति संभव हो सकी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने इस मुद्दे पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके कारण प्रदेश के कई हिस्सों के लोगों को वर्षों तक पानी की समस्या झेलनी पड़ी।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यमुना जल समझौते और राज्य में चल रही विभिन्न सिंचाई एवं पेयजल परियोजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद आने वाले समय में राजस्थान के अनेक जिलों में जल संकट काफी हद तक कम होगा। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पेयजल उपलब्धता बेहतर होगी, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति प्राप्त होगी।














