प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने उनके भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सली’ शब्द पर आपत्ति जताई। पायलट ने कहा कि जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर कही गई बातों पर भी सवाल उठाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से करीब 75 मिनट तक देश को संबोधित किया। उनके भाषण के बाद विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में सचिन पायलट ने प्रधानमंत्री के संबोधन के कई हिस्सों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
‘दिमागी नक्सली’ शब्द पर पायलट ने जताई आपत्ति
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ‘दिमागी नक्सलियों’ को अलग-थलग करने की जरूरत बताई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सचिन पायलट ने कहा कि इन दिनों नए-नए शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने ‘दिमागी नक्सली’ और ‘अर्बन नक्सली’ जैसे शब्दों का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा समय में जिम्मेदार लोगों को इस तरह की भाषा से बचना चाहिए।
पायलट ने यह भी कहा कि युवाओं में सरकार के खिलाफ पैदा हुए आक्रोश के कारण ऐसी भाषा सामने आ रही है। उनके मुताबिक, इस तरह की बयानबाजी को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा
सचिन पायलट ने प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का विषय लंबे समय से चर्चा में रहा है और कांग्रेस सरकार के समय पार्टी ने इसका समर्थन किया था। पायलट के अनुसार, संसद में यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, इसलिए इसे अब तक लागू नहीं किए जाने पर सवाल उठता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के मुद्दे के जरिए राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश की जा रही है। पायलट ने कहा कि महिला आरक्षण को लागू किया जाना चाहिए और इसके लिए और इंतजार नहीं होना चाहिए।
परिसीमन को लेकर क्या बोले सचिन पायलट?
परिसीमन के मुद्दे पर सचिन पायलट ने इसकी प्रक्रिया का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले जनगणना होती है, उसके बाद परिसीमन आयोग का गठन किया जाता है और आयोग की सिफारिशों के आधार पर परिसीमन लागू किया जाता है।
पायलट ने दावा किया कि राजनीतिक फायदे के लिए परिसीमन से जुड़े प्रावधानों को लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह और विपक्ष इस तरह की कोशिश के खिलाफ हैं।
इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद सचिन पायलट ने ‘दिमागी नक्सली’ टिप्पणी के साथ-साथ महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।














