राजस्थान में आगामी पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच शुक्रवार से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) परिवारों का व्यापक घर-घर सर्वेक्षण शुरू किया जा रहा है। राजस्थान ओबीसी आयोग की ओर से कराया जा रहा यह राज्यव्यापी सर्वे 23 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान नियुक्त कर्मचारी घर-घर जाकर ओबीसी परिवारों से संबंधित आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे। सर्वे पूरा होने के बाद आयोग सभी आंकड़ों का विश्लेषण कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा, जिसके आधार पर चुनावों में ओबीसी आरक्षण को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बताया जा रहा है कि राज्य चुनाव आयोग भी आयोग की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित करेगा। दरअसल, पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों की अधिसूचना जारी करने से पहले ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था तय करना जरूरी माना जा रहा है। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट चुनावी प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तबादलों से सर्वे प्रभावित होने की आशंका, आयोग ने सरकार को किया सतर्क
सर्वेक्षण शुरू होने से पहले राजस्थान ओबीसी आयोग ने राज्य सरकार को संभावित प्रशासनिक दिक्कतों को लेकर आगाह भी किया है। आयोग का कहना है कि वर्तमान में चल रही सरकारी कर्मचारियों की तबादला प्रक्रिया सर्वेक्षण कार्य पर असर डाल सकती है, जिससे रिपोर्ट तैयार करने में देरी होने की संभावना है।
मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में आयोग ने उल्लेख किया है कि राज्य सरकार ने शुक्रवार तक स्थानांतरण की अनुमति दी हुई है। इसी दौरान विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के साथ-साथ सर्वेक्षण कार्य में लगाए गए कार्मिकों का भी तबादला किया जा रहा है। आयोग का मानना है कि यदि सर्वेक्षण में तैनात कर्मचारियों को बीच में ही अन्य स्थानों पर भेज दिया गया, तो निर्धारित समय में कार्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कर्मचारियों के तबादले से रिपोर्ट तैयार होने में हो सकती है देरी
आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि सर्वेक्षण में लगे गणनाकर्मी और अन्य संबंधित कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यदि उन्हें वर्तमान जिम्मेदारियों से मुक्त कर किसी अन्य स्थान पर तैनात कर दिया गया तो घर-घर सर्वेक्षण की गति प्रभावित हो सकती है। इससे न केवल आंकड़े जुटाने में बाधा आएगी, बल्कि अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में भी विलंब हो सकता है।
आयोग ने सरकार से आग्रह किया है कि सर्वेक्षण कार्य पूरा होने तक इस अभियान से जुड़े कर्मचारियों को उनके मौजूदा कार्यस्थल पर ही बनाए रखा जाए, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर सर्वेक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत तैयार होगी आरक्षण संबंधी रिपोर्ट
राजस्थान ओबीसी आयोग को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण से संबंधित सिफारिशें तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी उद्देश्य से यह सर्वे कराया जा रहा है, ताकि वास्तविक आंकड़ों के आधार पर आरक्षण का निर्धारण किया जा सके।
आयोग से उम्मीद है कि वह अगस्त के दूसरे सप्ताह तक अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप देगा। इसके बाद राज्य चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
अगस्त के अंत या सितंबर में हो सकती है चुनाव तारीखों की घोषणा
सूत्रों के अनुसार, यदि आयोग तय समय पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर देता है तो राज्य चुनाव आयोग अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के दौरान पंचायत और शहरी निकाय चुनावों की अधिसूचना जारी कर सकता है। इसके बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू होगी और नवंबर तक मतदान संपन्न कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 31 जुलाई तक पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया था। हालांकि सरकार का कहना है कि जब तक ओबीसी आरक्षण को लेकर आयोग अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देता, तब तक चुनाव कराना संभव नहीं होगा। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही चुनावी कार्यक्रम को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।














