राजस्थान में खाद्य पदार्थों की 247 मंडियों में हड़ताल जारी है। इसको लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की बीजेपी सरकार पर सीधा हमला बोला है। गहलोत का कहना है कि सरकार के हालिया आदेश से व्यापारी और आम उपभोक्ता दोनों गंभीर परेशानी झेल रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि वह टकराव का रास्ता छोड़कर व्यापारियों से संवाद करे और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले।
गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार ने एक ऐसा आदेश जारी किया है जिसके तहत अब मंडी और उपमंडी यार्ड में गैर-अधिसूचित कृषि उपज और खाद्य पदार्थों पर भी अतिरिक्त शुल्क वसूला जाएगा। आदेश के मुताबिक, हर 100 रुपए के लेन-देन पर 50 पैसे यूजर चार्ज देना अनिवार्य किया गया है।
"आटा-चावल से लेकर ड्राई फ्रूट तक महंगे होंगे"
पूर्व सीएम ने कहा कि इस निर्णय की मार सीधी जनता पर पड़ेगी, क्योंकि इसके दायरे में रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाले चावल, आटा, दालें, मैदा, सूजी, तिलहन, खाद्य तेल, नमक और यहां तक कि ड्राई फ्रूट्स भी शामिल हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से खाद्य सामग्री के दाम बढ़ेंगे और महंगाई का बोझ आम उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा।
गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार का यह कदम न तो व्यापारियों के हित में है और न ही आम जनता के लिए राहतकारी। यह सिर्फ दोनों पक्षों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालने जैसा है।
राजस्थान की भाजपा सरकार ने एक आदेश के निकालकर मंडी और उप-मंडी यार्ड में गैर-अधिसूचित कृषि उपज और खाद्य पदार्थों पर प्रति 100 रुपए के लेन-देन पर 50 पैसे यूजर चार्ज देना होगा।
"हड़ताल से थमा कारोबार, बढ़ी आमजन की परेशानी"
गहलोत ने जानकारी दी कि नए आदेश के खिलाफ प्रदेशभर में 247 मंडियां हड़ताल पर उतर आई हैं। इसका सीधा असर व्यापारियों के कारोबार पर पड़ रहा है। वहीं, आम नागरिकों को खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और कीमत दोनों को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि वह तुरंत व्यापारियों के प्रतिनिधियों से वार्ता कर इस विवाद का हल निकाले। गहलोत ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति को जल्द काबू में नहीं किया गया तो इसका असर पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था और आमजन की जेब पर साफ नज़र आएगा।














