
राजस्थान की जनजातीय राजनीति के मजबूत स्तंभ और पूर्व कैबिनेट मंत्री नंदलाल मीणा अब हमारे बीच नहीं रहे। लंबी बीमारी के बाद शनिवार को उनका अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। आज उनका अंतिम संस्कार उनके गृह जिले प्रतापगढ़ में किया जाएगा, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समेत कई दिग्गज नेता उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचेंगे।
पूर्व मंत्री नंदलाल मीणा की पार्थिव देह शनिवार रात को अहमदाबाद से सड़क मार्ग द्वारा प्रतापगढ़ लाई गई। प्रतापगढ़ के अंबामाता कॉलोनी स्थित उनके निजी आवास पर रातभर उनके दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा रहा। आज सुबह 11 बजे उनके निवास से अंतिम यात्रा निकलेगी, जिसके बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
इस दुखद अवसर पर पूरा प्रतापगढ़ जिले में शोक की लहर है। स्थानीय बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर कोई इस जननायक के जाने से स्तब्ध है। नंदलाल मीणा सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक थे। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं को मुख्यधारा की राजनीति में न केवल उठाया बल्कि समाधान के लिए संघर्ष भी किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी आज सुबह उन्हें श्रद्धांजलि देने प्रतापगढ़ पहुंचेंगे। वे जयपुर से सुबह 8:30 बजे रवाना होंगे और लगभग 9:55 बजे अंबामाता हेलीपैड पर उतरेंगे। मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है और विशेष हेलीपैड भी तैयार किया गया है।
नंदलाल मीणा को अंतिम विदाई देने के लिए प्रतापगढ़ ही नहीं, आसपास के जिलों जैसे बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर से भी हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता, वर्तमान और पूर्व मंत्री, सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधि भी इस अंतिम यात्रा में शामिल होंगे। इसके साथ ही सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने आएंगे।
नंदलाल मीणा का राजनीतिक जीवन करीब तीन दशकों तक फैला रहा। उन्होंने कई बार विधायक के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और राजस्थान सरकार में मंत्री पद पर रहते हुए शिक्षा, जनजातीय विकास और राजस्व जैसे अहम विभागों को संभाला। उनका जीवन सादगी, संघर्ष और सेवा का परिचायक था। जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
आज जब उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन होगा, तो उनके साथ एक युग का अंत भी होगा। लेकिन नंदलाल मीणा का आदर्श, विचार और संघर्ष की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।














