
राजस्थान में खांसी की सिरप से कथित तौर पर तीन बच्चों की मौत के मामले ने हड़कंप मचा दिया है। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए बड़ी कार्रवाई की है। दवा निर्माण और नियमों से जुड़े प्रकरण में अनियमितताओं के आरोपों के चलते ड्रग कंट्रोलर–सेकंड राजाराम शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
निलंबन के दौरान जिम्मेदारियां
निलंबन की अवधि में शर्मा को चिकित्सा विभाग के प्रमुख शासन सचिव के कार्यालय में उपस्थिति दर्ज करानी होगी। जब तक विभागीय जांच पूरी नहीं होती, वे अपने पद पर कार्य नहीं कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद ज़रूरी है।
बच्चों की मौत और सिरप की जांच
इससे पहले भरतपुर और सीकर में सरकारी कफ सिरप डेक्स्ट्रोमेथोर्फन से बच्चों की मौत होने के दावे सामने आए थे। हालांकि, शुक्रवार को आई लैब रिपोर्ट में दवा को "सुरक्षित" और मानक के अनुरूप बताया गया है। इसके बावजूद विवाद थमा नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि जिन बच्चों की मौत हुई, उन्होंने दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना किया था।
सरकार की एडवाइजरी
इस पूरे प्रकरण के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने एक एडवाइजरी जारी की। इसमें स्पष्ट कहा गया कि डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन लिखते समय प्रोटोकॉल का पालन करें और मरीजों को केवल पर्चे के आधार पर ही दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही रोगियों को सलाह दी गई कि वे बिना चिकित्सकीय परामर्श के कोई भी दवा न लें, खासकर बच्चों को दवा लिखते समय नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।
यह मामला अब विभागीय जांच के अधीन है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में और गड़बड़ियां सामने आती हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने दवा निर्माण, वितरण और उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।














