
जयपुर। राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र लगातार सियासी गर्माहट का केंद्र बना हुआ है। बुधवार को कांग्रेस विधायकों ने झालावाड़ स्कूल हादसे और सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में काली पट्टी बांधकर नारेबाजी की और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का इस्तीफा मांगा। इस दौरान विधायकों ने हाथों में इस्तीफा देने की मांग वाली तख्तियां उठाई और हादसे में मारे गए मासूम बच्चों की याद में मोमबत्ती जलाकर दो मिनट का मौन रखा।
करीब आधे घंटे तक चला कांग्रेस का प्रदर्शन
कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन लगभग आधे घंटे तक चला। इसमें पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा इस प्रदर्शन में मौजूद नहीं थे। मीडिया से बातचीत में सचिन पायलट ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिम्मेदारी से बचने के लिए अक्सर पंडित नेहरू और राजीव गांधी का नाम लिया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि केंद्र में 11 साल से और राज्य में पौने दो साल से सत्तारूढ़ सरकारें क्या अपनी जिम्मेदारी से बच सकती हैं?
श्रद्धांजलि में भूल गए मासूम बच्चों को
सचिन पायलट ने इस बात पर गहरा अफसोस जताया कि विधानसभा की परंपरा के अनुसार सत्र के पहले दिन दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी जाती है, लेकिन झालावाड़ स्कूल हादसे में जान गंवाने वाले मासूम बच्चों को याद नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जब उत्तराखंड और कश्मीर जैसी घटनाओं में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जा सकती है, तो अपने ही राज्य के बच्चों को श्रद्धांजलि देना क्यों भूल गए? यह सरकार की गंभीर चूक है और उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी गलती दोहराई नहीं जाएगी।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे की मांग तेज कर दी। सचिन पायलट ने कहा कि राज्यभर में स्कूलों की दीवारें गिर रही हैं, मरम्मत और ऑडिट नहीं हो रहे हैं, लेकिन मंत्री ने अब तक कोई जिम्मेदारी नहीं ली है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार को इस त्रासदी की गंभीरता का अंदाजा नहीं है? पायलट ने स्पष्ट कहा कि कोर्ट के आदेश का इंतजार करने या दिल्ली से संकेत मिलने तक काम टालने की प्रवृत्ति अब नहीं चलेगी।
कांग्रेस की रणनीति
गौरतलब है कि कांग्रेस ने पहले ही तय कर लिया है कि वह मानसून सत्र में सरकार को हर दिन अलग-अलग मुद्दों पर घेरेगी। मंगलवार रात को संविधान क्लब में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में यह रणनीति तैयार की गई थी। पार्टी का मानना है कि जनहित के गंभीर सवालों पर सरकार को जवाबदेह ठहराना बेहद जरूरी है।














