
राजस्थान के अजमेर जिले में ठंड की शुरुआत होते ही मंदिरों में अनोखी गतिविधियां देखने को मिली हैं। भगवान की मूर्तियों को रुई भरे कंबल, मखमली शॉल, ऊनी टोपी और नरम जूते पहनाए जा रहे हैं। यह दृश्य देख दूर-दूर से आए श्रद्धालु मुस्कुराते हुए दर्शन कर रहे हैं। ठंड का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, भगवान पर भी पड़ रहा है।
गर्म वस्त्रों में सजाई मूर्तियां
आगरा गेट स्थित प्रसिद्ध गणेश मंदिर में श्रद्धालु राखी शर्मा बताती हैं कि बप्पा को सर्दियों में गर्म कपड़े पहनाना सदियों पुरानी परंपरा है। यह सिर्फ रस्म नहीं बल्कि भक्तों की अपार श्रद्धा का प्रतीक है। जैसे मां अपने बच्चे को ठंड से बचाती है, वैसे ही पुजारी भगवान की मूर्तियों की रक्षा करते हैं।
शिव सागर के मराठा कालीन श्री वैभव महालक्ष्मी और पंचमुखी हनुमान मंदिर में भी यही नजारा देखने को मिल रहा है। पंडित राखी शर्मा कहते हैं, “भगवान हमारे लिए सब कुछ हैं। जब हम खुद गर्म कपड़े पहनते हैं, तो उन्हें ठंड का सामना क्यों करने दें? ऋतु के अनुसार उनकी सेवा करना मंदिर की गरिमा बनाए रखता है और श्रद्धालुओं के मन को सुकून देता है।”
पूजा का समय बदला, मंदिर हुआ हीटेड
ठंड की वजह से अब सुबह की पूजा समय में बदलाव किया गया है। पूजा थोड़ी देर बाद शुरू होती है ताकि पुजारी आराम से आ सकें और श्रद्धालु बिना ठिठुरे दर्शन कर सकें। कई मंदिरों में बड़े हीटर लगाए गए हैं, जिससे गर्म हवा का झोंका आते ही पूरा वातावरण सुखद हो जाता है। अब मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि ठंड से राहत देने वाला आरामदायक स्थान भी बन गया है।
भोग में गर्माहट, ठंड में स्वादिष्ट प्रसाद
अब भगवान को ठंडे प्रसाद की बजाय गर्मागर्म व्यंजन चढ़ाए जा रहे हैं। गर्म दूध, मक्के-बाजरे की खिचड़ी, तिल की पट्टी, गजक और रेवड़ी का स्वाद पूरे मंदिर में फैल रहा है। श्रद्धालु भी प्रसाद पाकर खुश हो रहे हैं क्योंकि सर्दी में यह अनुभव और भी सुखद है। अजमेर की यह परंपरा अब केवल धार्मिक रिवाज नहीं रही, बल्कि भगवान के प्रति श्रद्धा, अपनापन और जीवंत आस्था का जीता-जागता प्रमाण बन गई है।














