
जयपुर। शिक्षा-जगत में उत्कृष्ट योगदान के लिए परिष्कार कॉलेज समूह ने वर्ष 2025 का परिष्कार शिक्षा-रत्न सम्मान जयपुर के बरकत नगर स्थित राजवंश पब्लिक सी. सै. स्कूल के प्राचार्य नवल जैन को प्रदान किया। यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर समर्पण, नवाचार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी अथक साधना का प्रतीक माना जा रहा है।
इस अवसर पर परिष्कार कॉलेज समूह के निदेशक डॉ. राघव प्रकाश और प्राचार्य डॉ. सविता पाईवाल ने संयुक्त रूप से उन्हें सम्मानित करते हुए उनके शैक्षिक योगदान को अद्वितीय करार दिया। समारोह में शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।
शिक्षा को जीवन का ध्येय बनाया
ज्ञातव्य है कि नवल जैन, श्रीमती प्रेम देवी जैन एवं श्री मन्ना लाल जैन के सुपुत्र हैं। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय शिक्षा-जगत को समर्पित करते हुए हजारों विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की दिशा दिखाई है। विद्यालय स्तर के बच्चों के बौद्धिक, भावनात्मक और कौशलगत विकास में उनकी भूमिका प्रेरणादायक रही है।
उन्होंने हमेशा विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और गति के अनुसार शिक्षा की पद्धतियाँ अपनाईं, जिससे बच्चे केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित न रहकर जीवन मूल्यों और व्यावहारिक कौशलों में भी निपुण बन सके।
शिक्षा में नवाचार और मार्गदर्शन
प्राचार्य जैन न केवल विद्यार्थियों के मार्गदर्शक रहे हैं, बल्कि अपने सहकर्मी शिक्षकों के लिए भी प्रेरणास्रोत बने हैं। उन्होंने विद्यालय में निरंतर शैक्षिक नवाचार लागू किए और समय की मांग के अनुसार अध्यापन पद्धतियों को आधुनिक रूप दिया।
उनकी पहल से विद्यालय में सृजनशील और विकासोन्मुख वातावरण तैयार हुआ, जिसमें शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते रहे। इसके फलस्वरूप विद्यालय के परीक्षा परिणाम लगातार बेहतर होते गए और अनेक विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा तथा व्यावसायिक क्षेत्रों में सफलता हासिल की।
संघर्ष और संवेदनशीलता का अद्भुत मेल
जैन ने अपने जीवन में शिक्षा की ऊँचाइयाँ पाने के लिए ज़मीनी स्तर पर संघर्ष किया। उन्होंने शिक्षा को केवल सम्पन्न वर्ग तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वंचित एवं कृषक परिवारों के बच्चों तक पहुँचाया।
उनका मानना है कि शिक्षा ही वह शक्ति है, जो सामाजिक असमानताओं को कम कर सकती है। इसी भावना से उन्होंने ऐसे विद्यार्थियों को हर संभव सहयोग प्रदान किया, जिनके पास संसाधनों की कमी थी। यह संवेदनशीलता उन्हें अन्य शिक्षाविदों से अलग पहचान दिलाती है।
परिष्कार समूह का गौरवपूर्ण सम्मान
परिष्कार कॉलेज समूह ने उनकी इस गौरवशाली शिक्षा यात्रा को नमन करते हुए उन्हें शिक्षा-रत्न सम्मान 2025 से अलंकृत किया। इस अवसर पर डॉ. सविता पाईवाल ने कहा कि श्री नवल जैन की प्रतिबद्धता, स्वप्नशीलता और संघर्षशीलता भावी पीढ़ी के लिए एक आदर्श है। वहीं डॉ. राघव प्रकाश ने उन्हें शिक्षा का "प्रकाश स्तंभ" बताते हुए कहा कि उनके कार्य समाज को दिशा देने वाले हैं।
विद्यार्थियों की सफलता ही सबसे बड़ा पुरस्कार
जैन ने सम्मान ग्रहण करते समय भावुक होते हुए कहा कि उनके लिए विद्यार्थियों की सफलता ही सबसे बड़ा पुरस्कार है। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा यह माना है कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सामाजिक उत्थान का माध्यम है। यही सोच मुझे हर दिन नये उत्साह से काम करने की प्रेरणा देती है।”
समाज के लिए प्रेरणा
इस सम्मान ने यह संदेश दिया कि समाज में शिक्षक का योगदान केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह भविष्य की नींव तैयार करने वाला होता है। जैन ने शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य किया है, उसने न केवल उनके विद्यार्थियों, बल्कि उनके परिवारों और समाज की दिशा भी बदली है।
समारोह का गरिमामय आयोजन
समारोह के दौरान विद्यालय और परिष्कार समूह के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। मंच से कई पूर्व विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस तरह जैन की शिक्षा और मार्गदर्शन ने उनकी जिंदगी की दिशा बदली।
सम्मान-पत्र में लिखा गया था कि श्री जैन ने शिक्षा-जैसे मानव विकास के उत्कृष्ट कार्य में अपने जीवन का अमूल्य समय देकर विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी है। उन्होंने वंचित वर्ग के विद्यार्थियों की जिंदगी में वह रोशनी जगाई है, जो अन्यत्र संभव नहीं थी।
नवल जैन को मिला परिष्कार शिक्षा-रत्न सम्मान 2025 न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह संपूर्ण शिक्षा-जगत के लिए प्रेरणादायक है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि संघर्ष, संवेदनशीलता और नवाचार के बल पर कोई भी शिक्षक समाज की धारा को बदल सकता है।
परिष्कार समूह की ओर से दिया गया यह पुरस्कार उन सभी शिक्षकों के लिए संदेश है, जो अपने विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने के लिए दिन-रात प्रयासरत रहते हैं।
मालवीय नगर में शुरू किया ब्लूम
गौरतलब है कि नवल जैन बरकत नगर स्थित राजवंश पब्लिक सीनियर सैकण्डरी स्कूल में 80 के दशक से अपनी सेवाएँ निरन्तर प्रदान कर रहे हैं। इस स्कूल की स्थापना स्वर्गीय सौरन सिंह चौहान ने की थी। वर्तमान समय में उनकी पुत्रवधू श्रीमती सीता चौहान इस स्कूल के निदेशक के रूप में कार्य कर रही हैं। उनके पौत्र अनिमेष सिंह चौहान सचिव स्तर पर कार्यरत हैं। दो वर्ष पूर्व श्रीमती सीता चौहान और अनिमेष चौहान ने जयपुर शहर के पॉश इलाके मालवीय नगर में भी ब्लूम नाम से एक स्कूल शुरू किया है।














