पीलूखेड़ा गांव में मोरेल बांध में जयपुर क्षेत्र से कथित रूप से आ रहे रसायनयुक्त और प्रदूषित जल को रोकने की मांग को लेकर किसानों की विशाल महापंचायत आयोजित की गई। इस महापंचायत में हजारों की संख्या में किसानों ने भाग लिया और सरकार से तुरंत प्रभावी कार्रवाई की मांग उठाई। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर जनआंदोलन छेड़कर सरकार पर दबाव बनाने को मजबूर होंगे। किसान नेताओं ने बताया कि मोरेल बांध का पानी 83 गांवों की लगभग 25 हजार बीघा कृषि भूमि की सिंचाई का मुख्य स्रोत है, लेकिन जयपुर क्षेत्र की फैक्ट्रियों से आने वाले रसायनयुक्त जल के कारण बांध का पानी लगातार जहरीला होता जा रहा है। उनका आरोप है कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब यह पानी न तो पीने योग्य बचा है और न ही सिंचाई के लिए सुरक्षित रह गया है। किसानों ने यह भी कहा कि प्रदूषित पानी के संपर्क में आने से खेतों में काम करने वाले लोगों में त्वचा संबंधी रोग बढ़ रहे हैं, साथ ही कुओं और बोरवेल का जलस्तर भी प्रभावित हो रहा है।
महापंचायत को संबोधित करते हुए डॉ. जय सिंह मीणा ने कहा कि यदि समय रहते इस प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो मोरेल बांध से जुड़ा लगभग 200 किलोमीटर क्षेत्र गंभीर रूप से प्रभावित होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका सीधा असर कृषि उत्पादन, पर्यावरण संतुलन और आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
किसान नेता कमलेश लोटन ने कहा कि दूषित जल के कारण ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर लगातार नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इससे कृषि भूमि की उर्वरता भी घट रही है और विभिन्न बीमारियों के फैलने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर तुरंत ठोस कदम उठाने की अपील की।
महापंचायत में मौजूद अन्य वक्ताओं—किसान नेता जवान सिंह मोच, पूर्व आईएएस ब्रजमोहन मीणा, राजेश्वरी मीणा, बिहारीलाल मीणा कांकरिया, सौम्या मीणा, सुरेंद्र भेड़ोंली, गिरिराज मीणा और रामोतार जोरवाल सहित कई लोगों ने कहा कि बांध के प्रदूषित पानी से न केवल दुर्गंध फैल रही है बल्कि इससे वायु गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि जल प्रदूषण के कारण जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में आ गया है और पशु भी इस पानी को पीने से बच रहे हैं।
पूर्व आईएएस ब्रजमोहन मीणा ने किसानों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया और कहा कि यह मुद्दा प्रशासन और सरकार तक मजबूती से पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि मोरेल बांध के प्रदूषण का मुद्दा विधायक रामविलास मीणा और विधायक इंदिरा मीणा भी विधानसभा में उठा चुके हैं, जिससे सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर गया है।
महापंचायत में यह मांग भी प्रमुखता से उठाई गई कि जयपुर से आने वाले औद्योगिक अपशिष्ट को मोरेल बांध में पहुंचने से पहले ही या तो डायवर्ट किया जाए या फिर प्रभावी ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर शुद्ध जल ही बांध में छोड़ा जाए।
बैठक में 21 सदस्यीय संघर्ष समिति के गठन का निर्णय लिया गया। साथ ही तय किया गया कि 12 जुलाई को दौसा और सवाई माधोपुर जिला कलेक्टरों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद 15 जुलाई को संघर्ष समिति की बैठक आयोजित कर आगे के आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
महापंचायत के समापन पर मित्रपुरा तहसीलदार को सरकार के नाम मांगों का ज्ञापन सौंपा गया और किसानों ने 5 जुलाई तक इस पर हुई प्रगति की जानकारी देने की मांग रखी। किसानों ने साफ चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा।














