जयपुर। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की जान जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। इस घटना को लेकर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे हादसों से सबक लेने की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को किसी गंभीर दुर्घटना के बाद जागने के बजाय पहले से ही आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने कहा कि लखनऊ में हुई घटना बेहद चिंताजनक है और इसे सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “15 बच्चों की मौत कोई छोटी बात नहीं है। सवाल यह है कि क्या राजस्थान सरकार भी किसी ऐसी ही दुखद घटना के बाद कार्रवाई करेगी? सरकार को अभी से सतर्क होने की जरूरत है।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने जयपुर में प्रस्तावित कोचिंग हब परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना पर करीब 400 से 500 करोड़ रुपये खर्च किए थे। उनके अनुसार, यह परियोजना 240 शैक्षणिक संस्थानों को एक व्यवस्थित और सुरक्षित परिसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। उन्होंने बताया कि लगभग 140 लोगों ने इसमें निवेश के लिए राशि भी जमा कर दी थी, लेकिन बाद में परियोजना की अनदेखी होने के कारण कई लोगों ने अपने पैसे वापस ले लिए।
गहलोत ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने इस योजना को आगे बढ़ाने के बजाय उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। उन्होंने कहा कि इस परिसर में प्रतिष्ठित संस्थानों को लाने की योजना थी और यहां भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की एक शाखा स्थापित करने पर भी विचार किया गया था। उनका कहना था कि यदि सरकार इच्छाशक्ति दिखाए तो वहां बेहतर शैक्षणिक ढांचा विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने दावा किया कि गोपालपुरा बाईपास क्षेत्र में विकसित किए गए इस कोचिंग हब में भविष्य में करीब एक लाख छात्रों के अध्ययन की व्यवस्था की जा सकती थी। उनके मुताबिक वहां विद्यार्थियों के लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार की उदासीनता के कारण परियोजना का लाभ छात्रों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
गहलोत ने कहा कि देश में पहले भी कोचिंग संस्थानों और छात्र आवासों से जुड़े कई हादसे सामने आ चुके हैं। उन्होंने दिल्ली की उस घटना का भी जिक्र किया, जिसमें पानी भरने के कारण छात्रों की मौत हो गई थी। इसके अलावा जयपुर के गोपालपुरा क्षेत्र में गैस रिसाव से कई विद्यार्थियों के प्रभावित होने की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे संकेतों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पहले से बने हुए सुरक्षित ढांचे का उपयोग नहीं किया जाएगा तो आखिर उसका उद्देश्य क्या रह जाएगा। गहलोत के अनुसार, करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई इमारतें लंबे समय से उपयोग के अभाव में पड़ी हुई हैं और समय के साथ उनकी स्थिति खराब होती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि इन भवनों का समय रहते उपयोग नहीं किया गया तो सार्वजनिक धन की बड़ी बर्बादी होगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परिसर में छात्रों के लिए लाइब्रेरी, फूड कोर्ट और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई थीं, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल सके। उन्होंने कहा कि समझ से परे है कि ऐसी उपयोगी परियोजनाओं को सक्रिय क्यों नहीं किया जा रहा।
अपने बयान के दौरान गहलोत ने जोधपुर की कुछ अधूरी और निष्क्रिय परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां अस्पताल की कई इमारतें उपयोग के बिना पड़ी हुई हैं। इसके अलावा सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी और स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट जैसी परियोजनाएं भी पूरी होने के बावजूद आम लोगों के उपयोग में नहीं लाई जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री से बातचीत कर इन परियोजनाओं को शुरू कराने का आग्रह भी किया था।
अशोक गहलोत ने राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न विभागों के भुगतान लंबे समय से लंबित हैं और कई योजनाओं का पैसा समय पर जारी नहीं हो रहा। उनका कहना था कि यदि सरकार वित्तीय दबाव में है तो उसे स्थिति स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई विभागों में ठेकेदारों और सेवा प्रदाताओं के भुगतान अटके हुए हैं। यहां तक कि छोटी-बड़ी वित्तीय स्वीकृतियां भी समय पर जारी नहीं हो पा रही हैं। गहलोत ने दावा किया कि इसका असर विकास कार्यों और आम लोगों दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को समय पर पेंशन नहीं मिल रही और कई सरकारी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और अन्य जिलों से किसानों की परेशानियों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। उनके अनुसार, कई स्थानों पर गेहूं खरीद की प्रक्रिया सुचारु रूप से नहीं चल रही है, जिससे किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि खरीद केंद्रों पर आवश्यक संसाधनों की कमी है और कई जगहों पर बोरे समय पर उपलब्ध नहीं हो रहे। गहलोत ने कहा कि पहले जहां गेहूं खरीद की समय-सीमा 30 जून तक रहती थी, वहीं इस बार उसे पहले समाप्त करने की कोशिश की गई, जिसके कारण किसानों में असमंजस की स्थिति बनी। हालांकि बाद में समय-सीमा बढ़ानी पड़ी।
अपने बयान के अंत में गहलोत ने कहा कि सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी बड़े हादसे के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय समय रहते प्रभावी कदम उठाना ही सुशासन की पहचान होती है और यही जनता की अपेक्षा भी है।














