
कर्नाटक में चल रही सियासी उठापटक पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्पष्ट कहा कि पार्टी हाईकमान लगातार अंदरूनी स्तर पर बातचीत कर रहा है। उन्होंने मीडिया में चल रही चर्चाओं को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि टीवी और अखबारों में जो कुछ सुनाई देता है, वह अक्सर आधी-अधूरी जानकारी पर आधारित होता है। उनकी मानें तो जो घटनाएं वास्तविक रूप से पार्टी के भीतर होती हैं, वे मीडिया की सुर्खियों से अलग होती हैं। इसलिए वे आम तौर पर इस प्रकार के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से बचते हैं।
"कौन किससे क्या वादा करता है, यह किसी को नहीं मालूम"
गहलोत ने डीके शिवकुमार के हालिया बयान से पैदा हुई राजनीतिक हलचल पर कहा कि किससे क्या वादा किया गया और किस संदर्भ में बातचीत हुई, यह बातें सार्वजनिक रूप से किसी को नहीं पता होतीं। पार्टी के भीतर संवाद हमेशा चलता रहता है और कई निर्णय बंद कमरों में लिए जाते हैं। ऐसे में अटकलों पर प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है।
"कांग्रेस की ताकत—हाईकमान पर भरोसा"
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि कांग्रेस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सभी राज्यों में मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष से लेकर वरिष्ठ नेता तक हाईकमान पर पूर्ण विश्वास रखते हैं। यही भरोसा पार्टी को एक सूत्र में बांधे रखता है। इसके बावजूद मीडिया में विभिन्न तरह की कहानियाँ फैलती रहती हैं, जो अक्सर वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खातीं।
एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कई बार वास्तविक घटनाक्रम कुछ और होता है, जबकि जनता के सामने उसका बिल्कुल अलग रूप पेश किया जाता है। उन्होंने कहा कि वह अभी इस मुद्दे पर खुलकर कुछ नहीं कहेंगे; भविष्य में स्थिति स्पष्ट होने पर ही टिप्पणी करेंगे।
डीके शिवकुमार के बयान ने बढ़ाई हलचल
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के ‘‘सीक्रेट डील’’ वाले बयान के बाद से ही राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज हैं। कहा जा रहा है कि उनके साथ कई विधायक सत्ता संरचना में बदलाव चाहते हैं। हालांकि कुछ इसे मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल से भी जोड़ रहे हैं।
शिवकुमार ने पहले ही साफ कर दिया कि वह मुख्यमंत्री बदलने जैसे मुद्दों पर खुलकर बात नहीं करेंगे, क्योंकि यह पार्टी के चार-पांच वरिष्ठ नेताओं के बीच हुआ एक ‘‘गोपनीय समझौता’’ है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपनी अंतरात्मा पर भरोसा है और वे उसी के अनुरूप काम करते हैं।
सत्ता में परिवर्तन की अटकलें—ढाई-ढाई साल के फार्मूले की चर्चा
राजनीतिक विशेषज्ञों का दावा है कि यह पूरा मामला कर्नाटक में संभावित सत्ता परिवर्तन और ‘‘ढाई-ढाई साल’’ की सीएम रोटेशन नीति से जुड़ा हो सकता है। कुछ विश्लेषक इसे डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने के कथित वादे से भी जोड़कर देख रहे हैं।














