
राजस्थान में अक्सर यह कहा जाता है— “मरे मां, मौसी जिए” — यानी मौसी को मां से भी ऊंचा दर्जा दिया जाता है। लेकिन जोधपुर कमिश्नरेट के एयरफोर्स थाना क्षेत्र से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने इस कहावत को शर्मसार कर दिया। यहां चार मौसियों ने मिलकर अपने ही 16 दिन के भांजे की ऐसी नृशंस हत्या की, जिसे सुनकर भी रूह कांप जाए।
अंधविश्वास का खौफनाक रूप
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना गहरे अंधविश्वास के चलते की गई। जोधपुर के पांच बत्ती क्षेत्र की नेहरू कॉलोनी में यह वारदात हुई, जहां चारों मौसियों ने नवजात को कथित रूप से तांत्रिक प्रक्रिया के नाम पर पैर से कुचलकर मार डाला। पड़ोसियों और परिजनों का दावा है कि महिलाएं किसी प्रकार की “देव आह्वान” रस्म का पालन कर रही थीं।
वायरल वीडियो ने बढ़ाया सनसनी
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है। इसमें एक महिला नवजात को गोद में लिए बैठी दिखाई दे रही है, जबकि कुछ और महिलाएं उसके आसपास बैठकर मंत्र-सदृश शब्द बोल रही हैं। माना जा रहा है कि वे ‘भेरू देव’ की अराधना कर रही थीं, जिन्हें स्थानीय लोग लोकदेवता के रूप में पूजते हैं। वीडियो देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि कोई तांत्रिक अनुष्ठान चल रहा था।
पिता का गंभीर आरोप— “मेरी सालियों की शादी नहीं हो रही थी”
मृत शिशु के पिता ने बेहद दर्दनाक आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी सालियों की शादी लंबे समय से नहीं हो पा रही थी। इसी कारण उन्होंने यह सोचकर उनके मासूम बेटे की बलि दी कि इससे उनकी राहें खुल जाएंगी। पिता ने कहा कि इस बर्बरता को वह कभी माफ नहीं कर सकते और हत्यारी मौसियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
बलि की आशंका या साजिश?
पिता ने यह भी शक जताया है कि यह वीडियो शायद खुद आरोपितों ने बनवाया हो, ताकि कानून की आंखों में धूल झोंक सकें और इसे किसी धार्मिक अनुष्ठान का रूप देकर बच निकलने की कोशिश कर सकें। उनका कहना है कि यह सीधी-सीधी निर्मम हत्या है, और इसे अंधविश्वास का नाम देकर नहीं छोड़ा जा सकता।
पुलिस जांच जारी, परिवार न्याय की लड़ाई में
फिलहाल एयरपोर्ट थाना पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। पुलिस अधिकारी अभी खुलकर कुछ नहीं कह रहे, लेकिन आरोप गंभीर होने के कारण मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। दूसरी ओर, शोक में डूबे परिजन लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि दोषियों को ऐसी सजा मिले ताकि भविष्य में कोई मासूम अंधविश्वास का शिकार न बने।














