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मुख्य सचिव ने दौसा एक्सप्रेस-वे हादसे पर की उच्चस्तरीय समीक्षा, सुरक्षा व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार के निर्देश

दौसा एक्सप्रेस-वे हादसे के बाद मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सड़क सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं, अतिक्रमण हटाने, रिफ्लेक्टर अभियान, ट्रॉमा सेंटर और हाईवे सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करने के व्यापक निर्देश दिए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 03 Jul 2026 11:45:20

मुख्य सचिव ने दौसा एक्सप्रेस-वे हादसे पर की उच्चस्तरीय समीक्षा, सुरक्षा व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार के निर्देश

जयपुर । मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को शासन सचिवालय में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दौसा जिले में हुई भीषण सड़क दुर्घटना के संबंध में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य स्तरीय निरीक्षण दल द्वारा घटनास्थल के निरीक्षण, उपलब्ध तथ्यों के संकलन तथा विस्तृत तकनीकी विश्लेषण के आधार पर तैयार रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि यह दुर्घटना सभी संबंधित विभागों के लिए गंभीर चेतावनी है और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को दूर करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क हादसों में होने वाली जनहानि किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है तथा दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में लगातार कमी लाने के लिए ठोस सुधारात्मक उपाय लागू किए जाएं, ताकि राज्य जीरो फेटेलिटी के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ सके।

वाहनों की तकनीकी स्थिति और पंजीयन रिकॉर्ड की होगी गहन जांच

मुख्य सचिव ने दुर्घटना के पूरे घटनाक्रम की क्रमवार समीक्षा करते हुए दुर्घटनाग्रस्त बस और ट्रेलर की तकनीकी स्थिति की विस्तृत जांच के निर्देश दिए। उन्होंने दोनों वाहनों के पंजीयन, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा स्थिति, लंबित चालान, वाहन मालिकों और चालकों की पृष्ठभूमि से संबंधित सभी पहलुओं की जांच सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही अन्य राज्यों में पंजीकृत वाहनों के मामले में संबंधित राज्यों के परिवहन विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक सूचनाएं प्राप्त करने और जांच को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में बस की बॉडी संरचना, उसकी सुरक्षा क्षमता, आग लगने के संभावित कारणों और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) जांच की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव के लिए वाहन निर्माण और संरचनात्मक सुरक्षा मानकों का कठोर अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

सीसीटीवी फुटेज और रात्रिकालीन दृश्यता पर विशेष फोकस

बैठक के दौरान दुर्घटना स्थल पर लगे सीसीटीवी और पीटीजेड कैमरों की फुटेज का भी अवलोकन किया गया। मुख्य सचिव ने दुर्घटना के समय की परिस्थितियों, ट्रेलर की दृश्यता, लेन अनुशासन, रात्रिकालीन विजिबिलिटी, रिफ्लेक्टर टेप एवं रिफ्लेक्टर लाइट की स्थिति, मार्ग संकेतकों की गुणवत्ता तथा ट्रम्पेट इंटरचेंज पर भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों के अनुरूप साइनेज व्यवस्था की समीक्षा की।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर मोड़ से पर्याप्त दूरी पहले बड़े, स्पष्ट और आसानी से दिखाई देने वाले साइनेज लगाए जाएं। इसके अतिरिक्त ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर वहां विशेष सुरक्षा उपाय किए जाएं तथा रात के समय दृश्यता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

राहत और बचाव कार्यों की कार्यप्रणाली की भी हुई समीक्षा

मुख्य सचिव ने दुर्घटना के बाद किए गए राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए पुलिस, एनएचएआई कंट्रोल सेंटर, एम्बुलेंस सेवाओं, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन एजेंसियों के रिस्पॉन्स टाइम का मूल्यांकन किया। उन्होंने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने में लगी अवधि, घायलों को अस्पताल पहुंचाने में लगा समय, निकटतम ट्रॉमा सेंटर की उपलब्धता, भौगोलिक दूरी तथा पोस्ट एक्सीडेंट इन्जरी मैनेजमेंट की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल दुर्घटनाओं को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि हादसे के बाद होने वाली मौतों को न्यूनतम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि समय पर प्रभावी चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो तो अनेक गंभीर रूप से घायल लोगों की जान बचाई जा सकती है।

एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस और आपात संसाधनों की होगी वैज्ञानिक तैनाती

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर संचालित बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस को चरणबद्ध तरीके से एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस में अपग्रेड किया जाए। इससे गंभीर घायलों को घटनास्थल पर ही बेहतर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा और अस्पताल पहुंचने से पहले की महत्वपूर्ण अवधि में उनकी जान बचाने की संभावना बढ़ेगी।

इसके साथ ही उन्होंने ट्रॉमा सेंटर, फायर फाइटिंग व्हीकल्स, क्रेन और अन्य आपातकालीन संसाधनों की वैज्ञानिक दूरी के आधार पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समुचित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर तेज और समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना सड़क सुरक्षा रणनीति का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते अतिक्रमण को सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए इसके खिलाफ राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में गठित सड़क सुरक्षा टास्क फोर्स के अध्यक्ष के रूप में जिला कलेक्टर नियमित रूप से इसकी निगरानी करें। साथ ही हाईवे किनारे किए गए अतिक्रमणों और अवैध पार्किंग स्थलों की पहचान कर निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि यातायात बाधित न हो और दुर्घटनाओं की संभावना कम की जा सके।

बैठक में परिवहन विभाग को भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर संचालित सभी भारी एवं वाणिज्यिक वाहनों में रिफ्लेक्टर टेप की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिन वाहनों में रिफ्लेक्टर, सुरक्षा उपकरण अथवा अन्य निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, उनके खिलाफ चालान के साथ-साथ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त वाहन पोर्टल पर जिन वाहनों के चालान लंबे समय से लंबित हैं, उनके विरुद्ध भी निवारक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने परिवहन यूनियनों, बस ऑपरेटरों और अन्य व्यावसायिक वाहन संगठनों के साथ नियमित संवाद एवं बैठकें आयोजित कर सड़क सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसमें हाईवे पर विकसित की जा रही वे-साइड एमेनिटीज, ट्रक चालकों के लिए डॉर्मिटरी एवं विश्राम सुविधाएं, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) की कार्यप्रणाली, रियल-टाइम प्रवर्तन प्रणाली, ओवरस्पीडिंग के मामलों में जारी चालान, राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं का विश्लेषण, नए ब्लैक स्पॉट की पहचान, फायर ब्रिगेड वाहनों की रणनीतिक तैनाती तथा निवारक निरीक्षण व्यवस्था की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी विभाग अपने-अपने दायित्वों का समयबद्ध निर्वहन करें और इस दिशा में की जा रही प्रगति की नियमित समीक्षा के लिए समय-समय पर फॉलोअप बैठकें आयोजित की जाएंगी।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दौसा जिला कलेक्टर डॉ. सौम्या झा, पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित तथा चिकित्सा एवं फायर सेफ्टी विभाग के अधिकारियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने दुर्घटना के बाद चलाए गए राहत एवं बचाव अभियान, घायलों को जिला अस्पताल में उपलब्ध कराई गई चिकित्सा सेवाओं तथा उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने राहत कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों से प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद मुख्य सचिव ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को एक्सप्रेस-वे पर इंटरचेंज और निकास स्थलों से पर्याप्त दूरी पहले ही अलग लेन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वाहन चालकों को समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल सकें, इसके लिए बड़े इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड और ओवरहेड साइनेज स्थापित किए जाएं, जिससे अचानक लेन बदलने की स्थिति से बचा जा सके और दुर्घटनाओं की आशंका कम हो।

उन्होंने एक्सप्रेस-वे के उन हिस्सों का तकनीकी सर्वेक्षण कराने के निर्देश भी दिए, जहां सड़क की सतह में किसी प्रकार की असमानता या संरचनात्मक कमी मौजूद है। ऐसी सभी खामियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर दूर करने के साथ-साथ चालक की सतर्कता बनाए रखने के उद्देश्य से उपयुक्त स्थानों पर रम्बल स्ट्रिप्स विकसित करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा सभी आपातकालीन कॉल बॉक्स की कार्यशीलता सुनिश्चित करने, हाईवे पर पुलिस पेट्रोलिंग को और अधिक मजबूत बनाने तथा दुर्घटना की स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर भी जोर दिया गया।

मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि लंबी दूरी तय करने वाले ट्रक एवं बस चालकों के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर पर्याप्त संख्या में रेस्ट एरिया विकसित किए जाएं। इन स्थानों पर किफायती भोजन, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और आवश्यक विश्राम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि चालक पर्याप्त आराम के बाद सुरक्षित तरीके से यात्रा जारी रख सकें और थकान के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।

बैठक में सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता, गृह, गृह रक्षा एवं जेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर आत्माराम सावंत, परिवहन विभाग के प्रमुख शासन सचिव भवानी सिंह देथा सहित विभिन्न संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की।

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