राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और अन्य मीडिया गतिविधियों पर रोक लगाने के आदेश को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने मंगलवार को सरकार से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय में इस तरह के प्रतिबंध लगाने के बजाय व्यवस्था में पारदर्शिता और जरूरी सुधारों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
गहलोत ने इस फैसले को लेकर सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि आदेश किस स्तर पर लिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस बारे में चर्चा हुई थी और क्या राज्य मंत्रिमंडल ने सामूहिक रूप से इसकी मंजूरी दी थी।
कैबिनेट की मंजूरी पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार के निर्णय की प्रक्रिया पर सवाल करते हुए कहा, "क्या मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से सलाह ली थी? क्या पूरी कैबिनेट ने इस आदेश पर विचार किया था? क्या यह कैबिनेट का सामूहिक फैसला था? हम यह जानना चाहते हैं।"
गहलोत का कहना है कि शिक्षा इस समय देश में महत्वपूर्ण चर्चा का विषय है, ऐसे में सरकारी स्कूलों में फोटो और वीडियो बनाने के साथ मीडिया गतिविधियों पर रोक लगाने की जरूरत पर सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए।
मीडिया प्रवेश पर रोक से पारदर्शिता को लेकर चिंता
गहलोत ने सरकारी स्कूलों में मीडिया के प्रवेश से जुड़े प्रतिबंध को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था से स्कूलों के कामकाज में पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा, "आपने मीडिया के प्रवेश पर रोक लगा दी है। बिना अनुमति कोई और भी अंदर नहीं जा सकता। स्कूलों में कई तरह की जरूरतें और गतिविधियां होती हैं, लेकिन आप कह रहे हैं कि बिना अनुमति कोई अंदर नहीं जाएगा।"
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में अलग-अलग तरह की गतिविधियां और जरूरतें होती हैं। ऐसे में बिना अनुमति प्रवेश पर रोक के फैसले को लेकर उन्होंने सरकार से पुनर्विचार करने की मांग की।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत: गहलोत
गहलोत ने इस मुद्दे को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव किए जाने चाहिए और ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जिससे पेपर लीक जैसी समस्याओं को रोका जा सके।
उन्होंने कहा, "शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों की जरूरत है। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जो पेपर लीक को रोके और दुनिया को यह संदेश दे कि भारत शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।"
शिक्षा और स्वास्थ्य को बताया अहम मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आम लोगों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हैं। उनके मुताबिक, आम नागरिक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ अपने बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चाहता है।
गहलोत ने शिक्षा विभाग के कामकाज को लेकर भी राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्कूलों में फोटो-वीडियोग्राफी और मीडिया गतिविधियों को लेकर जारी आदेश से विभाग की विश्वसनीयता पर और सवाल खड़े हुए हैं।
अशोक गहलोत ने राज्य सरकार से दोबारा मांग की कि सरकारी स्कूलों में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और मीडिया गतिविधियों पर रोक से संबंधित आदेश को तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को प्रतिबंधों के बजाय पारदर्शिता और सुधारों के जरिए मजबूत किया जाना चाहिए।














