
भाद्रपद माह में चल रहे दसलक्षण महापर्व के अवसर पर अखिल भारतीय श्रीमाल जैन जागृति संस्था ने विशेष धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल जैन धर्म की मूल शिक्षाओं और नैतिक मूल्यों से लोगों को जोड़ना था, बल्कि उन्हें आत्म-चिंतन और आध्यात्मिक अनुभव की दिशा में प्रेरित करना भी था।
कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण रहा पंडित शिखर चंद जी द्वारा आयोजित ऑनलाइन प्रवचन, जिसमें उन्होंने ‘उत्तम सत्य धर्म’ की गहन व्याख्या की। उन्होंने बताया कि जैन धर्म में सत्य केवल सच बोलना नहीं बल्कि आत्मा के परम तत्व को समझना, अनुभव करना और उसके अनुसार आचरण करना है। बाहरी संसार की असत्य और अनित्य चीज़ों को त्याग कर आत्मा के भीतर की शुद्धता को पहचानना ही उत्तम सत्य धर्म की नींव है। उनका यह संदेश श्रद्धालुओं के लिए एक मार्गदर्शन का काम करता है, जिससे जीवन में आंतरिक शांति और संतोष की अनुभूति होती है।
इसी अवसर पर एक जैन धार्मिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें 15 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 30 सदस्यों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के लिए स्वाध्याय सामग्री के रूप में छह ढालाओं के वीडियो पहले से उपलब्ध कराए गए थे, और ऑनलाइन प्रश्न उसी सामग्री पर आधारित थे। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य न केवल ज्ञानवर्धन करना था, बल्कि युवा प्रतिभाओं को धार्मिक शिक्षा में रुचि लेने के लिए प्रोत्साहित करना भी था। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को संस्था के मुख्य कार्यक्रम में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
कार्यक्रम के आयोजन में प्रायोजकों की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। श्री गिर्राज प्रसाद जी-मुन्नी देवी, डॉ. राकेश जी-अनिता जी, विजय जी-नीलम जी, तन्वी, चित्रांश और पिहान जैन टूंडीला वाले ने इसे सफल बनाने में योगदान दिया। कार्यक्रम का समन्वय श्री ज्ञानेन्द्र जी, डॉ. इन्द्र कुमार जी, चमत्कार जी, रमेश जी, श्रीमती अनिता जी और श्रीमती प्रतिभा जी ने किया। अंत में, संस्था के अध्यक्ष अजय कुमार जैन ने सभी आयोजकों, प्रायोजकों और प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कार्यक्रम की सफलता पर संतोष व्यक्त किया।














