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महाविकास अघाड़ी की बैठक से 23 विधायक रहे नदारद, शरद पवार की गैरमौजूदगी पर छलका उद्धव ठाकरे का दर्द

महाविकास अघाड़ी की बैठक में 60 में से 23 विधायक अनुपस्थित रहे, जबकि शरद पवार और जयंत पाटिल भी नहीं पहुंचे। बैठक में उद्धव ठाकरे ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाते हुए विपक्ष को मजबूत करने और संयुक्त आंदोलनों पर जोर दिया।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 25 Jun 2026 10:50:13

महाविकास अघाड़ी की बैठक से 23 विधायक रहे नदारद, शरद पवार की गैरमौजूदगी पर छलका उद्धव ठाकरे का दर्द

हाल ही में पार्टी के छह सांसदों की बगावत का सामना कर चुके शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अब महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की एकजुटता को लेकर भी चिंता जाहिर की है। बुधवार देर शाम आयोजित महाविकास अघाड़ी विधायकों की बैठक में अपेक्षा से कम उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। गठबंधन के 60 विधायकों में से केवल 37 विधायक ही बैठक में पहुंचे, जबकि 23 विधायक अनुपस्थित रहे। इतना ही नहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार और वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल भी इस बैठक में शामिल नहीं हुए। इस स्थिति ने गठबंधन की आंतरिक मजबूती को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए।

बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे का दर्द भी खुलकर सामने आया। उन्होंने सहयोगी दलों और नेताओं की गैरमौजूदगी के बीच गठबंधन की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल साथ होने का दावा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि वह एकता व्यवहार और गतिविधियों में भी दिखाई दे। उनके बयान को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

'जो चले गए, उन्हें जाने दें, जो साथ हैं उन्हें मजबूत करें'

अपने हालिया राजनीतिक झटकों का जिक्र करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि अब उन लोगों पर ध्यान देने का समय है जो पार्टी और गठबंधन के साथ खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो नेता या जनप्रतिनिधि साथ छोड़कर जा चुके हैं, उन्हें लेकर समय बर्बाद करने के बजाय मौजूदा साथियों के साथ संगठन को मजबूत करना अधिक जरूरी है।

बैठक में मौजूद नेताओं को संबोधित करते हुए ठाकरे ने कहा कि महाविकास अघाड़ी राज्य की राजनीति में अब भी एक प्रभावशाली शक्ति है और यदि तीनों दल समन्वय के साथ काम करें तो जनता के बीच मजबूत विकल्प के रूप में उभर सकते हैं। उन्होंने संगठनात्मक मजबूती और आपसी तालमेल बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।

शरद पवार और जयंत पाटिल की गैरहाजिरी बनी चर्चा का विषय

बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार और वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल की अनुपस्थिति ने भी सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। उनकी गैरमौजूदगी के बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। हालांकि बाद में जानकारी सामने आई कि दोनों नेता निजी कारणों की वजह से बैठक में शामिल नहीं हो सके और उनकी अनुपस्थिति का कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।

फिलहाल महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र जारी है और इसी दौरान विपक्षी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से यह बैठक आयोजित की गई थी। ऐसे समय में प्रमुख नेताओं की गैरहाजिरी ने स्वाभाविक रूप से चर्चा को और तेज कर दिया।

विधानसभा में रणनीति तय करने के लिए हुई थी बैठक

दरअसल इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विधानसभा सत्र के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों और विपक्ष की संयुक्त रणनीति पर चर्चा करना था। महाविकास अघाड़ी के नेताओं को यह तय करना था कि सरकार को किन मुद्दों पर घेरा जाएगा और सदन के भीतर विपक्ष किस प्रकार प्रभावी भूमिका निभाएगा।

बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं को लेकर अधिक चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब पूरा ध्यान उन कार्यकर्ताओं, विधायकों और नेताओं पर होना चाहिए जो गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं और महाराष्ट्र में एमवीए को और सशक्त बनाने के लिए काम कर रहे हैं।

'क्या हम वास्तव में एकजुट हैं?' उद्धव ने उठाया बड़ा सवाल

अपने संबोधन में ठाकरे ने गठबंधन की वास्तविक एकता को लेकर गंभीर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा, "हम अक्सर कहते हैं कि हम सब साथ हैं, लेकिन क्या हम वास्तव में साथ हैं? क्या विधानसभा के भीतर हम महाविकास अघाड़ी के रूप में एकजुट दिखाई देते हैं? क्या हम सभी मुद्दों को एक स्वर में उठाते हैं?"

उनका यह सवाल बैठक में मौजूद नेताओं के लिए आत्ममंथन का विषय बन गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया घटनाओं और पार्टी में हुई टूट के बाद ठाकरे अब गठबंधन की मजबूती को लेकर अधिक सतर्क दिखाई दे रहे हैं।

संयुक्त सभाओं और आंदोलनों पर दिया जोर

उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि आगामी समय में महाविकास अघाड़ी को केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जनता के बीच भी एकजुटता का संदेश देना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि तीनों दल मिलकर संयुक्त सभाएं, जनसभाएं, रैलियां और आंदोलन आयोजित करें, ताकि राज्यभर में विपक्ष की एकता का स्पष्ट संदेश पहुंचे।

उन्होंने कहा कि आगामी विधानमंडल सत्र में महाविकास अघाड़ी को एक मजबूत और संगठित विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए। साथ ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में होने वाले कार्यक्रमों में भी तीनों सहयोगी दलों की संयुक्त भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। ठाकरे का मानना है कि इससे न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि जनता के बीच भी गठबंधन की मजबूती का सकारात्मक संदेश जाएगा।

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