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CJP आंदोलन पर दिल्ली पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा, ‘30 हजार की भीड़ ने बैरिकेड तोड़े, 240 जवान घायल हुए’

CJP आंदोलन के दौरान 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दिया। पुलिस ने 30 हजार प्रदर्शनकारियों और 240 जवानों के घायल होने का दावा किया।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 18 Aug 2026 12:36:14

CJP आंदोलन पर दिल्ली पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा, ‘30 हजार की भीड़ ने बैरिकेड तोड़े, 240 जवान घायल हुए’

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के करीब एक महीने तक चले आंदोलन के दौरान 20 जुलाई को हुए ‘संसद चलो मार्च’ और पुलिस कार्रवाई को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। पुलिस ने अदालत में दायर हलफनामे में दावा किया है कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ हिंसक हो गई थी और कई स्तरों के बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया गया। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान 240 पुलिसकर्मी घायल हुए।

दिल्ली पुलिस ने अपने जवाब में कहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करते समय अधिकारियों और जवानों ने अधिकतम संयम बरता तथा केवल न्यूनतम आवश्यक बल का इस्तेमाल किया। यह जवाब उन याचिकाओं के बाद दाखिल किया गया है, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया था।

पुलिस ने क्या बताया सुप्रीम कोर्ट को?


नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा की ओर से दाखिल हलफनामे में पुलिस ने घटनाक्रम का विवरण देते हुए कहा कि करीब 30 हजार प्रदर्शनकारी मौके पर मौजूद थे। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगाए गए कई स्तरों के बैरिकेड तोड़ दिए और संसद की तरफ आगे बढ़ने की कोशिश की।

पुलिस का कहना है कि स्थिति बिगड़ने और भीड़ के हिंसक होने के बाद उसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। हलफनामे में बल प्रयोग को लेकर पुलिस ने यह रुख अपनाया है कि कार्रवाई अधिकतम संयम के साथ की गई और आवश्यकता से अधिक बल का इस्तेमाल नहीं किया गया।

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए थे सवाल

इस मामले में प्रदर्शनकारियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाओं में पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से इस घटनाक्रम पर जवाब मांगा था।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले यह संकेत भी दिया था कि प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों की कार्रवाई की जांच के लिए एक समिति गठित करने पर विचार किया जा सकता है। ऐसे में दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल हलफनामा मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मार्च के लिए अनुमति नहीं थी: दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में आंदोलन और मार्च से जुड़े अनुमति संबंधी पहलू पर भी जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को केवल 20 जून को धरना देने की अनुमति दी गई थी। पुलिस का कहना है कि निर्धारित समय के बाद, यानी शाम 5 बजे के बाद भी प्रदर्शनकारी स्थल पर मौजूद रहे और उसे खाली नहीं किया गया।

पुलिस के मुताबिक, 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च की अपील के बाद आंदोलन ने अलग रूप ले लिया। हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि संसद की ओर मार्च करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने अनुमति नहीं ली थी और पुलिस की ओर से भी इसकी अनुमति नहीं दी गई थी।

21 जून से लागू थी धारा 163

दिल्ली पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि नई दिल्ली जिले में 21 जून से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू थी। पुलिस के अनुसार, इसके बावजूद संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया गया।

अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल पुलिस के जवाब के बाद मामले में प्रदर्शनकारियों के आरोप और पुलिस के दावों पर आगे सुनवाई होगी। एक तरफ प्रदर्शनकारियों ने बल प्रयोग को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में कार्रवाई को आवश्यक बताते हुए भीड़ के हिंसक होने और बैरिकेड तोड़े जाने का दावा किया है।

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