अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बनने की पेशकश मिलने के बाद अब उनकी प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने उन्हें रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) यानी RPI(A) में शामिल होने पर विचार करने की सलाह दी थी। इस प्रस्ताव पर दीपके ने सीधे तौर पर कोई सहमति जताने के बजाय सोशल मीडिया पर तंज के जरिए जवाब दिया। उन्होंने उस खबर को साझा करते हुए लिखा, “पर अभी एक महीने पहले तो मैं एंटी-नेशनल था तुम्हारे लिए?”
दीपके की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा तेज हुई है। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन किया था।
रामदास आठवले ने क्यों दिया ऑफर?
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके को RPI(A) में शामिल होने का सुझाव दिया था। उन्होंने दीपके को आंबेडकरवादी बताते हुए उनकी सक्रियता की तारीफ की थी।
आठवले ने कहा था कि दीपके युवा और सक्रिय हैं और उन्हें डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सपने को आगे बढ़ाने के साथ समाज और पार्टी को मजबूत करने के लिए RPI(A) में शामिल होने पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ दीपके के नेतृत्व में हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया। आठवले के मुताबिक, आंदोलन करने के अनुभव का उपयोग पार्टी के लिए किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि दीपके को अरविंद केजरीवाल के साथ ज्यादा रहने के बजाय रिपब्लिकन पार्टी की टीम का हिस्सा बनना चाहिए।
आठवले ने CJP को लेकर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि “कॉकरोच जनता पार्टी चलाने का कोई फायदा नहीं है” और दीपके के अनुभव का इस्तेमाल RPI(A) में किया जा सकता है।
दीपके ने पुराने आरोपों की याद दिलाई
आठवले की पेशकश पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में करीब एक महीने पहले के घटनाक्रम की ओर इशारा किया। उन्होंने सवालिया अंदाज में पूछा कि जब अभी उन्हें NDA के साथ जुड़ने का न्योता दिया जा रहा है, तो एक महीने पहले उन्हें ‘एंटी-नेशनल’ क्यों कहा जा रहा था।
यह टिप्पणी उस समय के संदर्भ में थी जब जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ CJP के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन चल रहा था। संदर्भ सामग्री के अनुसार, उस दौरान दीपके और उनकी टीम के लिए ‘एंटी-नेशनल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया था।
जंतर-मंतर आंदोलन के बाद सुर्खियों में आए दीपके
अभिजीत दीपके ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP की अगुवाई में हुए आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। हजारों छात्रों ने एक महीने से अधिक समय तक पेपर लीक के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया था। आंदोलन के दबाव के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। CJP ने इस घटनाक्रम को अपने आंदोलन की बड़ी सफलता के तौर पर पेश किया।
इसके बाद दीपके लगातार चर्चा में बने हुए हैं और अब RPI(A) की ओर से मिले राजनीतिक प्रस्ताव ने उनके अगले कदम को लेकर अटकलों को और बढ़ा दिया है।
क्या राजनीति में कदम रखेंगे दीपके?
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अभिजीत दीपके पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि CJP फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने की योजना नहीं बना रही है। उनके अनुसार संगठन अभी एक ‘प्रेशर ग्रुप’ के तौर पर काम करेगा और देशहित से जुड़े मुद्दों को उठाएगा।
इसी दिशा में CJP ने महाराष्ट्र में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान भी शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार के मुद्दे को उठाना है। ऐसे में RPI(A) के न्योते पर दीपके का तंज भरा जवाब उनके संगठन के मौजूदा रुख के बीच आया है।














