बिहार की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर सियासी माहौल गर्माया हुआ है। पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड बंगले को खाली करने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और राष्ट्रीय जनता दल आमने-सामने नजर आ रहे हैं। एक ओर राबड़ी देवी ने आवास नहीं छोड़ने के संकेत दिए हैं, वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकारी संपत्ति पर किसी का स्थायी अधिकार नहीं हो सकता। इस बीच पूरे मामले पर राजद नेता और राबड़ी देवी के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है।
तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक तस्वीर साझा करते हुए मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपने शब्दों के चयन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उनके अनुसार किसी भी व्यक्ति के बारे में बोलते समय उसकी आयु, प्रतिष्ठा और सामाजिक सम्मान को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।
'राजनीति में मर्यादा सबसे बड़ी पूंजी'
अपने पोस्ट में तेज प्रताप यादव ने लिखा कि राज्य के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों से जनता शालीन और संतुलित भाषा की अपेक्षा करती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियां स्वस्थ राजनीतिक संस्कृति को कमजोर करती हैं। तेज प्रताप ने अपनी मां राबड़ी देवी का उल्लेख करते हुए कहा कि वह उनके परिवार के लिए सम्मान और आदर का विषय हैं, इसलिए उनके बारे में की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने आगे कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और असहमति दोनों के लिए स्थान है, लेकिन भाषा की गरिमा बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण है। राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सम्मानजनक व्यवहार ही लोकतंत्र की असली पहचान माना जाना चाहिए। तेज प्रताप ने नेताओं से सार्वजनिक बयान देते समय संयम बरतने की अपील भी की।
सम्राट चौधरी ने आवास विवाद पर क्या कहा था?
दरअसल, मंगलवार को मुजफ्फरपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी आवासों को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि सरकारी संपत्ति किसी व्यक्ति या परिवार की निजी जागीर नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग केवल अपने आवास को बचाने की चिंता में लगे रहते हैं, जबकि जनता की समस्याओं से उनका कोई सरोकार नहीं दिखाई देता।
सम्राट चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को नियमों का पालन करना पड़ता है और सरकारी आवास भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खाली करना होता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो सरकारी नियमों के तहत आवास खाली कराने की प्रक्रिया को रोक सके। मुख्यमंत्री की इसी टिप्पणी को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
नीतीश कुमार का उदाहरण देकर दी नसीहत
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री बने थे, तब नीतीश कुमार ने नियमानुसार सरकारी आवास छोड़कर दूसरे घर में स्थानांतरित होने में देर नहीं की थी। सम्राट चौधरी ने इसे सार्वजनिक जीवन में शुचिता और नियमों के पालन का उदाहरण बताया।
उन्होंने आगे कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्हें कई सरकारी आवास आवंटित हुए, लेकिन उन्होंने अधिकांश भवनों का उपयोग सरकारी कार्यों और कार्यालयों के लिए किया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यदि उनकी पार्टी या संगठन उन्हें पद छोड़ने के लिए कहेगा तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के निर्धारित समय में सरकारी आवास खाली कर देंगे। उनके अनुसार राजनीति व्यक्तिगत सुविधाओं के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा के लिए की जानी चाहिए।
राबड़ी देवी को मिला है नोटिस
गौरतलब है कि भवन निर्माण विभाग की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। इसी नोटिस के बाद यह पूरा विवाद शुरू हुआ और अब यह मामला राजनीतिक बयानबाजी का केंद्र बन गया है। एक ओर सरकार नियमों का हवाला दे रही है, जबकि दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक सम्मान और व्यवहार से जोड़कर देख रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।














