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कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े सवालों पर बोले मनोज झा, समर्थन के आरोपों को बताया निराधार; खुद स्पष्ट की पूरी कहानी

कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े विवाद पर मनोज झा ने दी सफाई। RJD सांसद ने कहा कि उन्होंने केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए सिफारिश पत्र लिखा था, CJP से किसी भी तरह के राजनीतिक या वैचारिक संबंध से किया इनकार।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 05 Jun 2026 9:15:51

कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े सवालों पर बोले मनोज झा, समर्थन के आरोपों को बताया निराधार; खुद स्पष्ट की पूरी कहानी

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर उठे राजनीतिक विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनका इस संगठन या उसके अभियान से किसी प्रकार का प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें CJP की गतिविधियों या उसके वैचारिक एजेंडे से जोड़ना गलत है। झा के अनुसार उन्होंने केवल एक औपचारिक सिफारिश पत्र लिखा था, जिसे अब राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। यह पूरा मामला उस समय चर्चा में आया जब सोशल मीडिया पर एक पत्र तेजी से वायरल होने लगा। इस पत्र में मनोज झा ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के अधिकारियों से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के लिए स्थान उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। पत्र सामने आने के बाद कुछ राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगे कि क्या RJD सांसद किसी तरह से कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यक्रमों का समर्थन कर रहे हैं। इसी को लेकर अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए लिखी थी केवल सिफारिश

मनोज झा ने बताया कि उन्होंने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब को एक पत्र लिखकर पत्रकार और CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास के लिए प्रेस वार्ता आयोजित करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। उनके मुताबिक यह एक सामान्य प्रक्रिया थी और इसे किसी राजनीतिक समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सौरभ दास ने उनसे संपर्क किया था और कार्यक्रम के लिए स्थान उपलब्ध कराने में मदद मांगी थी। सांसद होने के नाते उन्होंने केवल प्रशासनिक स्तर पर एक अनुशंसा की थी। इसके अलावा उनका उस संगठन की गतिविधियों, रणनीति या विचारधारा से कोई जुड़ाव नहीं है।

'वैचारिक स्पष्टता नहीं, इसलिए मेरा कोई संबंध नहीं'

RJD सांसद ने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस आंदोलन या संगठन की विचारधारा स्पष्ट न हो, उससे खुद को जोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि CJP को लेकर जो चर्चाएं चल रही हैं, उनमें उन्हें अनावश्यक रूप से घसीटा जा रहा है। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति को कार्यक्रम स्थल उपलब्ध कराने के लिए सिफारिश करना और किसी संगठन के राजनीतिक या वैचारिक एजेंडे का समर्थन करना, दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं। इसलिए दोनों को एक-दूसरे से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई चिट्ठी

विवाद उस समय और बढ़ गया जब मनोज झा द्वारा लिखा गया सिफारिशी पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से साझा किया जाने लगा। कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं और कुछ भाजपा नेताओं ने भी इस पत्र को पोस्ट करते हुए सवाल उठाए कि आखिर CJP और विपक्षी दलों के बीच क्या संबंध हैं। इन आरोपों का जवाब देते हुए मनोज झा ने कहा कि एक सांसद होने के नाते उन्हें अक्सर विभिन्न सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक समूहों, नागरिक मंचों और पत्रकारों की ओर से ऐसे अनुरोध मिलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की सहायता करना उनकी सार्वजनिक जिम्मेदारियों का हिस्सा है और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।

विश्वविद्यालय से जुड़े परिचितों के माध्यम से हुआ संपर्क

दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे मनोज झा ने बताया कि उनकी सौरभ दास से पहचान मुख्य रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े उनके कुछ वरिष्ठ परिचितों ने भी उस प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस के बारे में जानकारी दी थी। झा के अनुसार उन्हें बताया गया था कि एक प्रेस कार्यक्रम आयोजित किया जाना है और उसके लिए स्थान की आवश्यकता है। इसी आधार पर उन्होंने एक औपचारिक सिफारिश की। उन्होंने दोहराया कि इस प्रक्रिया का किसी राजनीतिक समर्थन या संगठनात्मक सहयोग से कोई संबंध नहीं था।

सौरभ दास ने भी रखा अपना पक्ष

दूसरी ओर, CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए किसी सांसद की अनुशंसा आवश्यक होती है, इसलिए उन्होंने मनोज झा से संपर्क किया था। दास के अनुसार उनकी ओर से केवल स्थान उपलब्ध कराने में मदद मांगी गई थी। उन्होंने कहा कि इसे राजनीतिक समर्थन के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना है। उनका कहना है कि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए प्रशासनिक सहायता लेना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

विरोध प्रदर्शन से पहले बढ़ी राजनीतिक चर्चा

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी 6 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म है और ऐसे में मनोज झा की चिट्ठी सामने आने के बाद कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या विपक्षी दलों का इस संगठन को अप्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है। हालांकि मनोज झा और CJP दोनों ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है।

आखिर विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

दरअसल, 3 जून को कॉकरोच जनता पार्टी ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में अपनी पहली औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। इसी कार्यक्रम के लिए स्थान उपलब्ध कराने को लेकर मनोज झा द्वारा लिखी गई चिट्ठी चर्चा का विषय बन गई। दिलचस्प बात यह है कि पत्र में कहीं भी कॉकरोच जनता पार्टी का नाम दर्ज नहीं था। उसमें केवल पत्रकार सौरभ दास के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने हेतु स्थान उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। बावजूद इसके, पत्र वायरल होने के बाद मनोज झा को CJP से जोड़कर देखा जाने लगा। अब इस पूरे विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए RJD सांसद ने कहा है कि उनकी भूमिका केवल एक सिफारिश तक सीमित थी और इसे किसी प्रकार के राजनीतिक समर्थन के रूप में पेश करना वास्तविकता से परे है। वहीं CJP ने भी साफ किया है कि उसे किसी विपक्षी दल का औपचारिक राजनीतिक संरक्षण प्राप्त नहीं है और वह स्वतंत्र रूप से अपनी गतिविधियां संचालित कर रही है।

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