न्यूज़
CJP Yogi Adityanath Jyotish Narendra Modi Rahul Gandhi

दरभंगा में BJP को झटका, लेकिन तेजस्वी के लिए भी खतरे की घंटी; MY वोट बैंक में सेंध

दरभंगा स्नातक सीट पर अनिल झा की जीत के बाद तेजस्वी यादव की चिंता बढ़ सकती है। जानिए ब्राह्मण, मुस्लिम और यादव वोटों के बंटवारे का पूरा सियासी समीकरण।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 30 Oct 2026 9:30:28

दरभंगा में BJP को झटका, लेकिन तेजस्वी के लिए भी खतरे की घंटी; MY वोट बैंक में सेंध

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव नतीजे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा झटका दिया है। यहां राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समर्थित उम्मीदवार अनिल कुमार झा ने भाजपा के निवर्तमान एमएलसी सर्वेश कुमार को हराकर जीत दर्ज की। हालांकि, इस नतीजे ने राजद नेता तेजस्वी यादव के सामने भी कुछ राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव के दौरान ब्राह्मण मतदाताओं का अनिल झा के पक्ष में खुलकर आना चर्चा में रहा, लेकिन प्रथम वरीयता के वोटों में राजद प्रत्याशी पीछे रहे। दूसरी ओर, मुस्लिम और यादव समुदाय से जुड़े उम्मीदवारों को भी अच्छी संख्या में वोट मिले। इसी वजह से दरभंगा का चुनाव परिणाम राजद के पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

ब्राह्मण मतदाताओं का समर्थन, फिर भी पहली वरीयता में पीछे रहे अनिल झा

मिथिलांचल के दरभंगा में ब्राह्मण मतदाताओं को लंबे समय से भाजपा का मजबूत समर्थक माना जाता रहा है। इस चुनाव में राजद ने अनिल कुमार झा को उम्मीदवार बनाया तो पार्टी कार्यकर्ताओं ने ब्राह्मण मतदाताओं के बीच यूजीसी बिल के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे पर लगातार बातचीत हुई और अनिल झा के समर्थन में ब्राह्मण मतदाताओं की सक्रियता दिखाई दी। हालांकि, मतगणना के शुरुआती चरण में इसका असर सीधे जीत के रूप में नहीं दिखा। प्रथम वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने पर भाजपा के सर्वेश कुमार को 16,115 वोट मिले थे, जबकि अनिल झा के खाते में 14,615 वोट आए। इस तरह पहली वरीयता में भाजपा प्रत्याशी 1,500 मतों से आगे थे। जनसुराज के मोहम्मद इम्तियाज नूरानी 10,227 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी मत नहीं मिले, इसलिए आगे की वरीयताओं के आधार पर मतगणना हुई।

जनसुराज के मुस्लिम उम्मीदवार को मिले 10 हजार से ज्यादा प्रथम वरीयता के वोट

प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने दरभंगा स्नातक सीट से मोहम्मद इम्तियाज नूरानी को उम्मीदवार बनाया था। उन्हें प्रथम वरीयता में 10,227 वोट मिले। इस तरह वह शुरुआती मतगणना में तीसरे स्थान पर रहे। चुनावी चर्चा में इसे मुस्लिम मतदाताओं के एक हिस्से के जनसुराज उम्मीदवार की ओर जाने के संकेत के तौर पर देखा गया। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि चुनाव के आधिकारिक नतीजों में जाति या धर्म के आधार पर मतदाताओं का अलग-अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए केवल उम्मीदवारों को मिले वोटों के आधार पर पूरे मुस्लिम समुदाय के मतदान व्यवहार के बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इस चुनाव में दूसरी वरीयता के मतों ने भी अहम भूमिका निभाई। कम वोट पाने वाले उम्मीदवारों के बाहर होने के बाद उनके मतपत्रों पर दर्ज अगली पसंद के अनुसार वोट आगे के उम्मीदवारों को स्थानांतरित हुए। जनसुराज उम्मीदवार के मतपत्रों से अनिल झा को मिले दूसरी वरीयता के वोटों ने अंतिम मुकाबले में उन्हें बढ़त दिलाने में मदद की।

यादव वोटों में भी दिखी बिखराव की तस्वीर?

दरभंगा चुनाव में यादव समुदाय से आने वाले छात्र नेता दिलीप कुमार भी मैदान में थे। उन्हें प्रथम वरीयता में करीब 6 हजार वोट मिलने की बात सामने आई। इस वजह से चुनावी विश्लेषण में यादव मतों के संभावित बंटवारे की चर्चा हो रही है। राजद का पारंपरिक MY यानी मुस्लिम-यादव समीकरण बिहार की राजनीति में पार्टी की सबसे अहम ताकतों में गिना जाता है। लालू प्रसाद यादव के दौर से ही इन दोनों समुदायों का समर्थन राजद के लिए महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में दरभंगा में मुस्लिम और यादव पृष्ठभूमि वाले अलग-अलग उम्मीदवारों को मिले वोटों को पार्टी के लिए राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, दिलीप कुमार को मिले वोटों को सीधे यादव समुदाय का वोट मानना भी सही नहीं होगा। चुनाव में मतदाताओं ने किन कारणों से किसी उम्मीदवार को प्राथमिकता दी, इसका पूरा आकलन केवल जातिगत पहचान के आधार पर नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस के अलग उम्मीदवार ने भी बढ़ाई राजद की मुश्किल

इस चुनाव में कांग्रेस ने भी अलग से उम्मीदवार उतारा था। पार्टी की ओर से ब्राह्मण उम्मीदवार रजनीकांत पाठक मैदान में थे। उन्हें प्रथम वरीयता में करीब 4 हजार वोट मिले। इस तरह ब्राह्मण मतदाताओं के बीच राजद और कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच भी वोटों का बंटवारा हुआ। राजद के नजरिये से यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस बिहार में उसकी प्रमुख सहयोगी पार्टी है। दोनों दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने से विपक्षी वोटों के बंटने की संभावना बनी। अगर कांग्रेस और राजद साथ मिलकर चुनाव लड़ते तो नतीजे पर क्या असर पड़ता, यह कहना मुश्किल है, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार को मिले वोटों ने मुकाबले में अलग भूमिका जरूर निभाई।

4,010 वोटों से जीते अनिल झा, दूसरी वरीयता ने पलटा परिणाम

दरभंगा स्नातक सीट पर मतगणना करीब 60 घंटे तक चली। प्रथम वरीयता के मतों में भाजपा के सर्वेश कुमार आगे थे, लेकिन बाद के चरणों में वरीयता के आधार पर हुए मतों के हस्तांतरण से मुकाबला बदल गया। अंतिम घोषित आंकड़ों के मुताबिक, अनिल कुमार झा को 25,406 और सर्वेश कुमार को 21,396 वोट मिले। इस तरह अनिल झा ने 4,010 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। दरभंगा की यह जीत राजद के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन चुनाव के दौरान सामने आए वोटों के बंटवारे ने तेजस्वी यादव के सामने गठबंधन और सामाजिक समीकरण को लेकर चुनौती भी रखी है। पार्टी के लिए एक ओर कांग्रेस जैसे सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम और यादव मतदाताओं के समर्थन को एकजुट रखने पर भी ध्यान देना होगा। हालांकि, इस एक चुनाव के नतीजे से पूरे बिहार में MY समीकरण के कमजोर होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

राज्य
View More

Shorts see more

क्या लव बाइट जानलेवा हो सकता है? जानें कब बनता है यह गंभीर खतरा और किन उपायों से पा सकते हैं राहत

क्या लव बाइट जानलेवा हो सकता है? जानें कब बनता है यह गंभीर खतरा और किन उपायों से पा सकते हैं राहत

  • लव बाइट प्यार की निशानी है, लेकिन कभी-कभी खतरे की वजह भी बन सकती है।
  • एक छोटा सा निशान स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या से जुड़ा हो सकता है।
  • जानिए कब हिक्की सामान्य है और कब सतर्क होने की जरूरत है।
read more

ताजा खबरें
View More

PM मोदी ने एकतानगर में ₹400 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं का किया उद्घाटन, IRCTC होटल समेत कई सुविधाएं शुरू
PM मोदी ने एकतानगर में ₹400 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं का किया उद्घाटन, IRCTC होटल समेत कई सुविधाएं शुरू
विपक्ष की एकजुटता में कहां पड़ रही दरार? 1 नवंबर की रैली में शामिल नहीं होंगी ये पार्टियां
विपक्ष की एकजुटता में कहां पड़ रही दरार? 1 नवंबर की रैली में शामिल नहीं होंगी ये पार्टियां
कॉकरोच जनता पार्टी की दिवाली पार्टी में जुटेंगे विपक्षी नेता, दीपके और रांका की मौजूदगी पर भी नजर
कॉकरोच जनता पार्टी की दिवाली पार्टी में जुटेंगे विपक्षी नेता, दीपके और रांका की मौजूदगी पर भी नजर
‘कल मिलते हैं, साथ चलते हैं’, राहुल गांधी ने साझा किया रैली का रूट मैप
‘कल मिलते हैं, साथ चलते हैं’, राहुल गांधी ने साझा किया रैली का रूट मैप
‘CEC को जाना ही होगा, SIR पर रोक लगानी होगी’, नेहा बोरा ने रामलीला मैदान रैली से पहले किया बड़ा ऐलान
‘CEC को जाना ही होगा, SIR पर रोक लगानी होगी’, नेहा बोरा ने रामलीला मैदान रैली से पहले किया बड़ा ऐलान
दिल्ली : मंगोलपुरी में जूता फैक्ट्री में भीषण आग, 4 मजदूरों की मौत, 2 गंभीर
दिल्ली : मंगोलपुरी में जूता फैक्ट्री में भीषण आग, 4 मजदूरों की मौत, 2 गंभीर
सोना ₹12,300 और चांदी ₹48,000 सस्ती, अक्टूबर में Gold-Silver की कीमतों में बड़ी गिरावट
सोना ₹12,300 और चांदी ₹48,000 सस्ती, अक्टूबर में Gold-Silver की कीमतों में बड़ी गिरावट
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी घूमने का बना रहे हैं प्लान? जान लें टिकट का चार्ज, समय और पहुंचने का आसान रास्ता
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी घूमने का बना रहे हैं प्लान? जान लें टिकट का चार्ज, समय और पहुंचने का आसान रास्ता
शरीर में विटामिन D की कमी होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण, समय रहते ऐसे करें पहचान
शरीर में विटामिन D की कमी होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण, समय रहते ऐसे करें पहचान
इतिहास, समुद्र और एडवेंचर का संगम है इजरायल, घूमने के लिए ये 7 जगहें हैं खास
इतिहास, समुद्र और एडवेंचर का संगम है इजरायल, घूमने के लिए ये 7 जगहें हैं खास
हफ्ते में दो बार मछली खाने की सलाह क्यों देते हैं विशेषज्ञ? जानें कौन-सी मछली है बेहतर
हफ्ते में दो बार मछली खाने की सलाह क्यों देते हैं विशेषज्ञ? जानें कौन-सी मछली है बेहतर
अकेले सफर का है शौक तो इन बातों को न करें नजरअंदाज, सुरक्षित रहेगी आपकी यात्रा
अकेले सफर का है शौक तो इन बातों को न करें नजरअंदाज, सुरक्षित रहेगी आपकी यात्रा
खाते वक्त बार-बार दांतों के बीच आ रही है जीभ? शरीर में इन कमियों का हो सकता है संकेत
खाते वक्त बार-बार दांतों के बीच आ रही है जीभ? शरीर में इन कमियों का हो सकता है संकेत
कभी नीली तो कभी फिरोजी नजर आती है पैंगोंग झील, जानें इस खूबसूरत जगह की खासियत
कभी नीली तो कभी फिरोजी नजर आती है पैंगोंग झील, जानें इस खूबसूरत जगह की खासियत