
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता मोहन यादव ने बिहार में अपने चुनाव प्रचार के दौरान एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए की बढ़ती लोकप्रियता से घबराए विरोधियों ने उनके रैली स्थल तक पहुंचने वाले हेलीपैड और सड़क को जानबूझकर खोद दिया, ताकि वे वहां न पहुंच सकें। यह बयान उन्होंने अपनी एक जनसभा में दिया और बाद में इसका वीडियो क्लिप एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा किया, जिसने राजनीतिक हलचल तेज कर दी।
मोहन यादव ने कहा, “मुझे बताया गया कि हमारे विरोधी एनडीए की जीत से डर गए हैं। उन्होंने यहां तक किया कि हेलीपैड और जाने वाला रास्ता खोद दिया गया। लेकिन मैं बिना डर और संकोच के यहां तक पहुंच गया।” यादव ने दिनभर बिहार में कई कार्यक्रमों में भाग लिया — पटना में रोड शो, मनेर में रैली, और मधेपुरा जिले में एक जनसभा भी शामिल थी।
हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। पटना के जिलाधिकारी थ्यागराजन एस.एम. ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, “हमें ऐसी किसी घटना की कोई जानकारी नहीं है। संबंधित इलाके के अधिकारियों ने भी किसी तरह की तोड़फोड़ की रिपोर्ट नहीं दी है।”
इसी तरह, पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने भी बयान जारी करते हुए कहा, “मेरे पास ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। अगर ऐसा कुछ हुआ होता, तो निश्चित रूप से इसकी जानकारी दी जाती।”
वहीं, मधेपुरा के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने भी मोहन यादव के दावे को खारिज करते हुए कहा, “सोमवार को हुई जनसभा में इस तरह की कोई घटना नहीं हुई। वहां पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात था और कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।”
इस पूरे प्रकरण पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा गर्म है। जहां भाजपा समर्थक इसे विपक्ष की “घबराहट” के रूप में देख रहे हैं, वहीं विरोधी दल इसे “राजनीतिक नाटक” और “प्रचार स्टंट” बता रहे हैं। प्रशासन के इनकार के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मुख्यमंत्री मोहन यादव को यह जानकारी किसने दी और इस बयान का आधार क्या था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार चुनावी माहौल में इस तरह के विवादास्पद बयानों से जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश भी हो सकती है। हालांकि, प्रशासन के सख्त खंडन के बाद अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि बीजेपी इस बयान पर आगे क्या रुख अपनाती है।














