कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने इस बयान की निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान भाषा की मर्यादा और पद की गरिमा का ध्यान रखना जरूरी है।
चिराग पासवान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी धरती से देश के प्रधानमंत्री के प्रति इस तरह की टिप्पणी किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक, राजनीति में विरोध और असहमति के लिए पर्याप्त जगह है, लेकिन इसका आधार तथ्यों और तर्कों को होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियों को।
चिराग पासवान ने भाषा की मर्यादा पर दिया जोर
चिराग पासवान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि बिहार सभ्यता की जननी है और ऐसे में राज्य की धरती से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति की गई अभद्र टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद सामान्य हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा और संवैधानिक पदों की गरिमा का सम्मान बनाए रखना आवश्यक है। चिराग के अनुसार, राजनीतिक विरोध तथ्यों और तर्कों पर आधारित होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति को लेकर की गई निजी टिप्पणियों पर। उनकी यह प्रतिक्रिया उस विवाद के बीच आई है, जो पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खरगे की प्रधानमंत्री मोदी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद शुरू हुआ। इस बयान पर सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष की आलोचना की है।
बिहार सभ्यता की जननी है, ऐसे में बिहार की धरती से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी द्वारा देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के प्रति की गई अभद्र टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा और पद की गरिमा का सम्मान बनाए रखना जरूरी है। राजनीतिक विरोध तथ्यों और तर्कों पर आधारित होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियों पर। @ANI • @PTI_News • @ians_india
— युवा बिहारी चिराग पासवान (@iChiragPaswan) October 25, 2026
संतोष कुमार सुमन ने भी जताई आपत्ति
बिहार सरकार में लघु जल संसाधन मंत्री और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने भी खरगे की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने यह बयान डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी को लेकर की गई टिप्पणी के संदर्भ में दिया। संतोष कुमार सुमन ने कहा कि प्रधानमंत्री के पिता को लेकर इस्तेमाल की गई भाषा भारतीय लोकतंत्र की गरिमा, सार्वजनिक जीवन की मर्यादा और भारतीय संस्कृति की परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक मतभेद व्यक्त करते समय भी भाषा और व्यवहार में संयम बनाए रखना चाहिए।
श्रीकृष्ण सिंह की जयंती का उल्लेख कर माफी की मांग
संतोष कुमार सुमन ने डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के महत्व का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि श्री बाबू जैसे महान नेता की जयंती समाज को प्रेरणा देने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का अवसर है। उनके मुताबिक, ऐसे अवसर पर राजनीतिक कटुता बढ़ाने वाली टिप्पणियां उचित नहीं हैं। सुमन ने मल्लिकार्जुन खरगे से इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। वहीं, चिराग पासवान ने अपने बयान में राजनीतिक विरोध को तथ्यों और तर्कों तक सीमित रखने तथा सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा का सम्मान करने पर जोर दिया।














