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विजयवाड़ा में 9 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 36 साल से फरार कमांडर भी शामिल; दो विधायकों की हत्या का आरोपी

विजयवाड़ा में 9 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, जिनमें 36 साल से अंडरग्राउंड टॉप कमांडर भी शामिल। दो विधायकों की हत्या के आरोपी पर बड़े खुलासे, जानिए पुलिस कार्रवाई और पुनर्वास योजना की पूरी जानकारी।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 30 Mar 2026 3:40:59

विजयवाड़ा में 9 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 36 साल से फरार कमांडर भी शामिल; दो विधायकों की हत्या का आरोपी

विजयवाड़ा में सुरक्षाबलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है, जहां नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के अंतिम चरण से ठीक पहले 9 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इन सरेंडर करने वालों में एक ऐसा नाम भी शामिल है, जो पिछले 36 वर्षों से भूमिगत रहकर सक्रिय था। यह घटनाक्रम राज्य में नक्सल गतिविधियों के कमजोर पड़ने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

36 साल तक अंडरग्राउंड रहा शीर्ष कमांडर

आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे चर्चित नाम चेल्लूरी नारायण राव उर्फ सुरेश का है, जो लंबे समय से संगठन में शीर्ष पदों पर रह चुका है। बताया जाता है कि वह CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य होने के साथ-साथ आंध्र-ओडिशा बॉर्डर स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव भी रह चुका है। लगभग साढ़े तीन दशक तक भूमिगत रहकर उसने संगठन के लिए काम किया।

उसके अलावा आत्मसमर्पण करने वाले अन्य आठ माओवादी भी अलग-अलग राज्यों—छत्तीसगढ़ और ओडिशा—से जुड़े हुए थे, जिनमें प्लेटून कमांडर और एरिया कमेटी के सदस्य शामिल हैं। इन सभी ने राज्य के पुलिस महानिदेशक हरीश कुमार गुप्ता के समक्ष औपचारिक रूप से सरेंडर किया।

पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सहायता

राज्य सरकार की ‘सरेंडर और पुनर्वास’ नीति के तहत इन सभी को मुख्यधारा में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत शीर्ष कमांडर सुरेश को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जबकि अन्य सदस्यों को उनकी भूमिका और रैंक के अनुसार 1 लाख से 5 लाख रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा।

इसके अलावा, तत्काल राहत के तौर पर सभी 9 आत्मसमर्पित माओवादियों को 20-20 हजार रुपये की नकद सहायता भी प्रदान की गई है, ताकि वे नई शुरुआत कर सकें।

गंभीर मामलों में रहा शामिल

पुलिस के अनुसार, सुरेश का नाम कई बड़े माओवादी हमलों में सामने आ चुका है। वह आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में हुए कई हमलों की साजिश और क्रियान्वयन में शामिल रहा है। खास तौर पर वर्ष 2018 में दो पूर्व विधायकों—किदारी सर्वेश्वर राव और सिवरी सोमेश्वर राव—की हत्या के मामले में वह मुख्य आरोपी रहा है।

इसके अलावा सुरेश पर सुरक्षाबलों पर कई घात लगाकर किए गए हमलों (एंबुश) में शामिल होने के भी आरोप हैं, जो लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बने रहे।

भारी मात्रा में हथियार बरामद

आत्मसमर्पण के साथ ही पुलिस ने माओवादियों के पास से हथियारों का बड़ा जखीरा भी बरामद किया है। इसमें INSAS राइफल, बीजीएल हथियार, .303 राइफल्स, SBBL गन और सिंगल-शॉट राइफल्स शामिल हैं। इसके अलावा विस्फोटक सामग्री, कारतूस और संचार उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जो उनकी गतिविधियों की गंभीरता को दर्शाते हैं।

नक्सल नेटवर्क पर बड़ा असर

डीजीपी हरीश कुमार गुप्ता ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान बताया कि हाल ही में सात अलग-अलग मुठभेड़ों में 8 माओवादी मारे गए, जिनमें तीन सेंट्रल कमेटी के सदस्य भी शामिल थे। इसके साथ ही 81 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया और 106 अन्य ने आत्मसमर्पण किया है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इन कार्रवाइयों के बाद आंध्र प्रदेश में सक्रिय भूमिगत माओवादी नेटवर्क अब लगभग समाप्त हो चुका है और राज्य में नक्सली गतिविधियां ‘शून्य’ के करीब पहुंच गई हैं। यह उपलब्धि सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है, जो लंबे समय से इस चुनौती से जूझ रही थीं।

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