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मैक्सिको की शानदार जीत पर विवाद की छाया, वर्ल्ड कप मुकाबले में गूंजे समलैंगिक विरोधी नारे

मैक्सिको ने चेक गणराज्य को 3-0 से हराकर पहली बार विश्व कप ग्रुप चरण के सभी मैच जीते, लेकिन मुकाबले के दौरान लगे समलैंगिक विरोधी नारों ने जीत की चमक फीकी कर दी। जानिए मैच, विवाद और खिलाड़ियों के रिकॉर्ड से जुड़ी पूरी जानकारी।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 25 Jun 2026 12:20:28

मैक्सिको की शानदार जीत पर विवाद की छाया, वर्ल्ड कप मुकाबले में गूंजे समलैंगिक विरोधी नारे

विश्व कप फुटबॉल में मैक्सिको ने इतिहास रचते हुए ग्रुप चरण के अपने तीनों मुकाबले जीत लिए, लेकिन चेक गणराज्य के खिलाफ मिली इस यादगार जीत पर दर्शकों के एक विवादित व्यवहार ने सवाल खड़े कर दिए। मैच के दौरान स्टेडियम में समलैंगिक विरोधी नारे सुनाई दिए, जिसके चलते एक बार फिर मैक्सिको फुटबॉल से जुड़े पुराने विवाद चर्चा में आ गए।

मैक्सिको ने चेक गणराज्य को 3-0 से हराकर ग्रुप चरण का समापन शानदार अंदाज में किया। टीम की ओर से दूसरे हाफ में माटेओ शावेज और जूलियन क्विनोनेस ने छह मिनट के भीतर दो गोल दागकर मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया। इसके बाद इंजरी टाइम में अल्वारो फिडाल्गो ने तीसरा गोल कर जीत को और मजबूत बना दिया।

हालांकि मैदान पर टीम के बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद मैच के दौरान दर्शकों के एक वर्ग द्वारा लगाए गए अपमानजनक नारों ने पूरे आयोजन को विवादों में ला दिया। यह नारा तब सुनाई दिया जब चेक गणराज्य के गोलकीपर मातेज कोवर पहले हाफ के अंतिम क्षणों में गोल किक लेने की तैयारी कर रहे थे।

स्पेनिश भाषा में इस्तेमाल होने वाला यह शब्द लंबे समय से विवादों का विषय रहा है। इसका प्रयोग विरोधी गोलकीपर का ध्यान भंग करने के लिए किया जाता रहा है, लेकिन इसे समलैंगिक समुदाय के प्रति अपमानजनक और भेदभावपूर्ण माना जाता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संस्था फीफा पहले भी मैक्सिको फुटबॉल महासंघ पर जुर्माना और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई कर चुकी है।

करीब ढाई दशक पहले लोकप्रिय हुआ यह नारा 2014 के ब्राजील विश्व कप के दौरान वैश्विक स्तर पर चर्चा में आया था। इसके बाद भी 2018 और 2022 विश्व कप में ऐसे मामले सामने आए, जिसके चलते फीफा ने कई बार सख्त चेतावनी जारी की। इस तरह की घटनाओं के कारण मैक्सिको को पहले भी लाखों डॉलर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

मैक्सिको की टीम पहले ही नॉकआउट चरण में पहुंच चुकी थी, लेकिन उसने अंतिम ग्रुप मुकाबले में भी कोई ढिलाई नहीं दिखाई। लगातार तीसरी जीत के साथ टीम ग्रुप ए में शीर्ष स्थान पर रही। दूसरी ओर चेक गणराज्य केवल एक अंक के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गया।

22 वर्षीय माटेओ शावेज, जो अपना पहला विश्व कप खेल रहे हैं, ने 55वें मिनट में शानदार गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। इसके छह मिनट बाद जूलियन क्विनोनेस ने अपना दूसरा टूर्नामेंट गोल दागते हुए स्कोर 2-0 कर दिया। इसके बाद अतिरिक्त समय में अल्वारो फिडाल्गो ने तीसरा गोल कर जीत पर मुहर लगा दी।

मैक्सिको के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि टीम ने पहली बार विश्व कप के ग्रुप चरण के तीनों मैच जीतने का कारनामा किया। इससे पहले उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1986 और 2002 में रहा था, जब टीम ने दो जीत और एक ड्रॉ के साथ अगले दौर में जगह बनाई थी। दिलचस्प बात यह है कि उन दोनों अभियानों में मौजूदा कोच जेवियर अगुइरे भी टीम का हिस्सा रहे थे। 1986 में वह खिलाड़ी थे, जबकि 2002 में टीम के मुख्य कोच।

ग्रुप ए में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद मैक्सिको अब मंगलवार को एज़्टेका स्टेडियम में राउंड ऑफ 32 का मुकाबला खेलेगा। उसके प्रतिद्वंद्वी का फैसला अन्य ग्रुप मुकाबलों के परिणामों के बाद होगा।

एज़्टेका स्टेडियम मैक्सिको के लिए हमेशा से भाग्यशाली साबित हुआ है। इस प्रतिष्ठित मैदान पर खेले गए नौ विश्व कप मुकाबलों में टीम अब तक एक भी मैच नहीं हारी है। बुधवार को खेले गए इस मुकाबले में 80,824 दर्शक मौजूद थे, जिन्होंने स्टेडियम को पूरी तरह भर दिया।

मैक्सिको की राष्ट्रीय टीम, जिसे ‘एल ट्राइ’ के नाम से जाना जाता है, को अपने घरेलू मैदान एज़्टेका में बेहद कम हार का सामना करना पड़ा है। यहां उसकी पिछली हार सितंबर 2013 में होंडुरास के खिलाफ विश्व कप क्वालीफायर मुकाबले में हुई थी।

इस मैच में मैक्सिको के फुटबॉल का भविष्य और अनुभव दोनों देखने को मिले। 17 वर्षीय गिलबर्टो मोरा विश्व कप इतिहास में शुरुआती एकादश में शामिल होने वाले मैक्सिको के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए। उनकी मौजूदगी ने टीम के उज्ज्वल भविष्य की झलक दिखाई।

वहीं दूसरी ओर अनुभवी गोलकीपर गुइलेर्मो 'मेमो' ओचोआ ने भी एक विशेष उपलब्धि हासिल की। 40 वर्षीय ओचोआ 77वें मिनट में मैदान पर उतरे और इसके साथ ही वे छह अलग-अलग विश्व कप में खेलने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए। इस सूची में अर्जेंटीना के लियोनेल मेस्सी और पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे दिग्गज पहले से मौजूद हैं।

पिछले वर्ष नवंबर में पनामा के खिलाफ मैत्री मैच में हार झेलने के बाद से मैक्सिको लगातार 11 मुकाबलों में अपराजित रहा है। कोच अगुइरे ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान अपनी टीम के लगभग सभी खिलाड़ियों को अवसर दिया है। 26 सदस्यीय दल में से 25 खिलाड़ियों को मैदान पर उतारा जा चुका है।

चेक गणराज्य के खिलाफ मुकाबले में भी कई नए खिलाड़ियों को मौका मिला। माटेओ शावेज उन पांच खिलाड़ियों में शामिल थे, जो दक्षिण कोरिया के खिलाफ पिछले मुकाबले की शुरुआती एकादश में नहीं थे, लेकिन इस मैच में उन्होंने अपनी छाप छोड़ दी।

ओचोआ ने अपने संभावित आखिरी विश्व कप अभियान में अंतिम 13 मिनट और अतिरिक्त समय तक खेलते हुए प्रशंसकों का अभिवादन स्वीकार किया। 13 जुलाई को वह 41 वर्ष के हो जाएंगे और पहले ही संकेत दे चुके हैं कि विश्व कप समाप्त होने के बाद वे अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कह सकते हैं।

गौरतलब है कि ओचोआ 2006 और 2010 विश्व कप में रिजर्व गोलकीपर के रूप में टीम का हिस्सा थे, जबकि 2014, 2018 और 2022 में उन्होंने मुख्य गोलकीपर की भूमिका निभाई। मौजूदा विश्व कप में राउल रेंगल टीम के पहली पसंद के गोलकीपर हैं, लेकिन ओचोआ का अनुभव अब भी मैक्सिको की टीम के लिए अमूल्य माना जाता है।

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