Met this morning with the families of the 8 Indians detained in Qatar.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) October 30, 202 आठ भारतीय नागरिकों को अगस्त 2022 में कथित जासूसी के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था और 26 अक्टूबर को कतर की एक अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। भारत ने फैसले को “बेहद चौंकाने वाला” बताया और कहा कि वह मामले में सभी “कानूनी विकल्प” तलाशेगा।
Stressed that Government attaches the highest importance to the case. Fully share the concerns and pain of the families.
Underlined that Government will continue to make all efforts to secure their release.…
कतर में 8 नौसेना दिग्गजों को मौत की सजा मिलने पर भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा, “सरकार की ओर से यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि हम कानूनी प्रक्रिया अपनाएं और अपने पूर्व कर्मियों को सुरक्षित वापस लाएं।”
कूटनीतिक या राजनीतिक तौर पर भी सुलझाने की तैयारी
सूत्रों ने कहा कि मुद्दे का समाधान खोजने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। पता चला है कि भारत को कतर की अदालत के फैसले की प्रति अभी तक नहीं मिली है। अदालत के फैसले पर कतर की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है। मामले से वाकिफ लोगों ने कहा कि फैसले की गहन जांच के बाद नयी दिल्ली अपने विकल्पों पर आगे बढ़ेगी। सूत्रों ने बताया कि भारत मामले को कूटनीतिक या राजनीतिक तौर पर भी सुलझाने पर विचार कर सकता है।
इन्हें मिली है सजा-ए-मौत
कतर की अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद विदेश मंत्रालय ने इस फैसले पर हैरानी और एतराज जताया था। मंत्रालय ने कहा कि वो इस फैसले से स्तब्द हैं और कानूनी विकल्प तलाश रही है। बता दें कि पूर्व भारतीय नौसेना कर्मियों में कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रागेश शामिल हैं।
ये सभी लोग अपनी रिटायरमेंट के बाद दोहा की एक कंपनी में काम करते थे, जिसके काम से वो कतर गए थे। इन भारतीयों पर इजरायल के लिए कतर के सबमरीन प्रोजेक्ट की गुप्त जानकारी चुराने का आरोप लगा है।













