
राज्य सरकार ने जनता की सहूलियत के लिए प्राइवेट लैब में RTPCR टेस्ट की दर को कम किया हैं लेकिन इसको लेकर लैब वालों का पक्ष हैं कि यह कीमत लागत से बहुत कम हैं। इसपर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सलाह दी हैं कि लैब का पक्ष सुनें फिर दर तय करें। हाईकोर्ट ने आरटीपीसीआर टेस्ट की दर लागत से कम रखने के मामले में एजी से कहा है कि वे 15 मई तक यह बताएं कि पैथ लैब संचालक किस अफसर को अपना अभ्यावेदन दें। वहीं अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को पैथ लैब का पक्ष सुनकर टेस्ट की दर तय की जानी चाहिए।
अदालत ने यह मौखिक निर्देश एक दर्जन पैथ लैब संचालकों की याचिका पर दिया। इसमें कहा कि आरटी-पीसीआर जांच की दर पिछले साल अप्रैल माह में 4500 रुपए तय की थी। लेकिन कई बार इसे कम कर बाद में 500 रुपए कर दिया। प्रार्थियों ने जांच दर बढ़ाने के लिए सरकार को प्रार्थना पत्र भी दिया। लेकिन सरकार ने मशीनी अंदाज में दर बढ़ाने की बजाय कम कर उसे 350 रुपए कर दिया।
जबकि मशीन, प्रशासनिक खर्च और रखरखाव आदि के अलावा हर जांच में कम से कम 620 रुपए की लागत आती है। राज्य सरकार ने दर कम करने से पहले उनका पक्ष सुना नहीं है। वहीं राज्य सरकार का कहना था कि एक हजार जांच करने में औसत लागत 208 रुपए प्रति जांच आती है। ऐसे में आमजन के हितों व पैथ लैब संचालकों पर ज्यादा भार नहीं पड़े इसे ध्यान में रखकर ही दरें तय की हैं।














