राजधानी जयपुर के जलेब चौक और उसके आस-पास के इलाकों से स्ट्रीट वेंडर्स को हटाए जाने के मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर भी आरोप लगाए हैं।
गहलोत का कहना है कि जयपुर में जलेब चौक और उसके आस-पास के क्षेत्रों से जबरन स्ट्रीट वेंडर्स को हटाया जा रहा है, जबकि उनके पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। गहलोत ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह इस मुद्दे पर संज्ञान ले और इन गरीब वेंडर्स के साथ हो रही अन्यायपूर्ण कार्रवाई को रोका जाए। साथ ही पथ विक्रेता अधिनियम के तहत इन्हें वैध तरीके से व्यवसाय करने का अधिकार दिया जाए।
गहलोत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट X पर लिखा कि यूपीए सरकार के समय 2014 में पथ विक्रेता अधिनियम बनाया गया था, जिसका उद्देश्य रेहड़ी-पटरी वालों को एक स्थिर वेंडिंग जोन और एक पक्की जगह प्रदान करना था। लेकिन, केंद्र में एनडीए सरकार के आने के बाद इस अधिनियम को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। गहलोत ने इस मामले में केंद्र सरकार की नीतियों को कठघरे में खड़ा किया है।
2014 में UPA सरकार के दौरान रेहड़ी-पटरी वालों को वेंडिंग जोन एवं एक पक्की जगह देने के उद्देश्य से पथ विक्रेता अधिनियम बनाया गया था। परन्तु केन्द्र में NDA सरकार आने के बाद इस अधिन
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जयपुर के रेहड़ी-पटरी विक्रेता यूनियन के प्रतिनिधि उनसे मिले और बताया कि जलेब चौक एवं आसपास के इलाकों में वर्षों से अपना रोज़गार चला रहे विक्रेताओं को बलपूर्वक हटाया जा रहा है। इन विक्रेताओं के पास वैध कागजात होने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गहलोत ने इस मुद्दे पर चिंता जताई और इन विक्रेताओं के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।














