
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने ‘शराब नीति घोटाला’ मामले की जांच के सिलसिले में यहां राउज एवेन्यू कोर्ट में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ एक पूरक आरोपपत्र दायर किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली आबकारी नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच के बाद आरोपपत्र दायर किया गया है, जिसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय कदाचार शामिल होने का दावा किया गया है।
इस साल जून की शुरुआत में सीबीआई ने केजरीवाल को शराब नीति मामले में गिरफ्तार किया था, जब राउज एवेन्यू कोर्ट ने एजेंसी को आप सुप्रीमो से कोर्ट में पूछताछ करने की अनुमति दी थी।
एजेंसी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पर शराब नीति मामले में "मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक" होने का आरोप लगाया है। इसने कहा है कि आप के पूर्व मीडिया प्रभारी और केजरीवाल के करीबी सहयोगी विजय नायर कई शराब उत्पादकों और व्यापारियों के संपर्क में थे।
सीबीआई ने आरोपपत्र में यह भी दावा किया है कि शराब नीति पर दिल्ली के पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया के फैसलों को पूर्वव्यापी मंजूरी केजरीवाल की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने दी थी।
एजेंसी ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने बिना किसी तर्क के शराब के थोक विक्रेताओं का लाभ मार्जिन 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करवा लिया।
सीबीआई ने अदालत के समक्ष पहले की सुनवाई में कहा था, "अरविंद केजरीवाल कथित शराब घोटाले की साजिश का हिस्सा हैं। दिल्ली सरकार के सभी फैसले उनके निर्देशों के अनुसार ही लिए गए।"
यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय ने 21 मार्च को कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े एक मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। उसके बाद से सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है, लेकिन वे अभी भी जेल में हैं क्योंकि सीबीआई ने उन्हें उसी मामले में गिरफ्तार किया था।














