
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपने कार्यकाल के दौरान कई बार सुर्खियों में रहे, लेकिन उनका अचानक इस्तीफा राजनीति में हलचल मचा गया। इस मुद्दे पर अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि धनखड़ और केंद्र सरकार के बीच रिश्ते काफी हद तक बिगड़ गए थे।
चिदंबरम के मुताबिक, "जगदीप धनखड़ को इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि उन्होंने अपनी संवैधानिक मर्यादाएं पार की थीं। खासकर जस्टिस यशवंत वर्मा के मुद्दे पर उन्होंने सरकार के खिलाफ खड़े होकर उसका विश्वास खो दिया।"
उन्होंने कहा कि जब कोई संवैधानिक पदाधिकारी सरकार के खिलाफ खड़ा होता है और उसका भरोसा खो देता है, तो उसके पास पद छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
इस बीच द वायर और NDTV की रिपोर्टों में भी इसी प्रकार की अटकलें लगाई गई हैं कि धनखड़ का रुख हाल के महीनों में ज्यादा स्वतंत्र और मुखर होता जा रहा था, जिससे प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य प्रमुख मंत्रालयों में असहजता देखी जा रही थी।
द प्रिंट की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उन्होंने हाल ही में संसद में सरकार के विधायी प्रक्रियाओं और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर कुछ टिप्पणियां की थीं, जिसे सत्ता पक्ष ने 'सीमाएं लांघने' जैसा माना।
राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव के अनुसार, "धनखड़ जैसे पदों पर बैठे लोग यदि संविधान की भावना के अनुरूप काम करें, तो सत्ता को असहज लग सकता है।"
चिदंबरम का यह बयान इस पूरे मामले में एक नया दृष्टिकोण जोड़ता है। उन्होंने संकेत दिया कि धनखड़ और सरकार के रास्ते बहुत पहले ही अलग हो चुके थे, और इस्तीफा केवल उसी अंतर्विरोध का सार्वजनिक परिणाम है।














