
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने हाल ही में एक बयान देकर सियासी हलचल तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि जब वे पाकिस्तान और बांग्लादेश गए तो उन्हें वहां कोई अलगाव महसूस नहीं हुआ, बल्कि माहौल बिल्कुल घर जैसा लगा। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति में "पड़ोसी पहले" का सिद्धांत अपनाया जाना चाहिए।
उनका बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्ते और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। स्वाभाविक है कि पित्रोदा की टिप्पणी पर राजनीतिक घमासान होना तय था।
"पड़ोसियों से संबंध सुधारना जरूरी"
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में पित्रोदा ने कहा – “मेरे विचार में भारत को अपनी विदेश नीति में पड़ोसियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। सवाल यह है कि क्या हम उनके साथ रिश्ते सुधार सकते हैं? हमारे पड़ोसी छोटे देश हैं, वे कई मुश्किलों से गुजर रहे हैं और उन्हें हमारी मदद की जरूरत है। हमें आपसी झगड़े और लड़ाइयों के बजाय सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए। हां, यह सच है कि आतंकवाद और हिंसा जैसी समस्याएं हैं, लेकिन उनसे निपटने का हल भी शांति और समझदारी में ही है।”
"विदेश जैसा महसूस ही नहीं हुआ"
पित्रोदा ने आगे कहा – “मैं जब पाकिस्तान गया तो वहां मुझे अपने ही घर जैसा अनुभव हुआ। इसी तरह बांग्लादेश और नेपाल की यात्रा के दौरान भी कोई परायापन नहीं लगा। वहां के लोग, उनकी संस्कृति और जीवनशैली हमें काफी हद तक अपनी ही याद दिलाती है। इसलिए मुझे नहीं लगा कि मैं किसी विदेशी भूमि पर हूं।”
भाजपा का पलटवार
कांग्रेस नेता के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा – “राहुल गांधी के करीबी और कांग्रेस के ओवरसीज प्रमुख सैम पित्रोदा खुलेआम कहते हैं कि उन्हें पाकिस्तान में घर जैसा लगता है। यही वजह है कि यूपीए सरकार ने 26/11 जैसे बड़े आतंकी हमले के बाद भी पाकिस्तान पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं की। पित्रोदा का बयान यह साबित करता है कि कांग्रेस और उसके नेता पाकिस्तान के प्रति कितनी नरमी रखते हैं।”














