
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने अगस्त की बैठक में ब्याज दरों में किसी तरह का परिवर्तन न करके आम जनता को निराश किया है। लगातार तीन बार रेट में कटौती करने के बाद इस बार की नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि आपकी मासिक किस्त यानी ईएमआई में कोई राहत नहीं मिलने वाली।
SBI रिसर्च ने इस बार रेपो रेट में 0.25% की कमी की संभावना जताई थी, लेकिन रिज़र्व बैंक ने बाज़ार की इन अपेक्षाओं को दरकिनार करते हुए नीतिगत दरों को यथावत बनाए रखा। हालांकि पॉलिसी स्टांस को ‘न्यूट्रल’ बनाए रखने के चलते भविष्य में रेट कट की संभावनाएं पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई हैं।
ट्रंप के टैरिफ और वैश्विक दबाव के बीच आरबीआई ने दिखाई सतर्कता
हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर टैरिफ लगाने और भविष्य में इन्हें और बढ़ाने की चेतावनी दी गई है। इस तरह के अंतरराष्ट्रीय दबाव का असर आरबीआई के नीति-निर्माण पर साफ़ तौर पर झलकता है।
हालांकि, मौजूदा कैलेंडर वर्ष में RBI पहले ही रेपो रेट में कुल मिलाकर 1% की कटौती कर चुका है। खासतौर पर जून 2025 की बैठक में 0.50% की बड़ी कटौती के बाद अगस्त पॉलिसी में स्थिरता की उम्मीद की जा रही थी, जो अंततः सही साबित हुई।
रेपो रेट बरकरार, ब्याज दरों में कोई फेरबदल नहीं
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी मीटिंग के बाद बताया कि रेपो रेट को 5.50% पर यथावत रखा गया है। इस निर्णय की पूर्वानुमान पहले से ही कई विश्लेषणों और सर्वेक्षणों में किया गया था।
इस वर्ष की शुरुआत से अब तक, फरवरी में 0.25% और अप्रैल में भी इतनी ही कटौती की गई थी। जून की बैठक में अप्रत्याशित रूप से 0.50% की कटौती की गई थी, जिससे बाजार को राहत मिली थी। लेकिन इस बार, अधिकांश विशेषज्ञों ने दरों में स्थिरता की ही संभावना जताई थी, जो पूरी तरह सच साबित हुई।
महंगाई पर नियंत्रण बरकरार, लेकिन आगे बढ़ने के संकेत
महंगाई को लेकर आरबीआई ने अपने अनुमान में थोड़ा सुधार किया है। गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कोर महंगाई 4.4% तक पहुंच गई है। वहीं, चौथी तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई 4% रहने की संभावना है।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए औसत महंगाई दर का अनुमान अब घटाकर 3.1% कर दिया गया है, जो पहले 3.7% था। दूसरी तिमाही का पूर्वानुमान 3.4% से घटाकर 2.1% कर दिया गया है, जबकि तीसरी तिमाही का अनुमान 3.9% से घटाकर 3.1% किया गया है। हालांकि चौथी तिमाही में यह 4.4% पर स्थिर रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यह दर बढ़कर 4.9% तक पहुंच सकती है।
जीडीपी ग्रोथ अनुमान यथावत, विकास दर 6.5% पर बरकरार
आरबीआई गवर्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि देश की आर्थिक विकास दर को लेकर कोई संशोधन नहीं किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.5% रहने का अनुमान कायम रखा गया है।
उन्होंने चारों तिमाहियों के संभावित आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पहली तिमाही में विकास दर 6.5%, दूसरी में 6.7%, तीसरी में 6.6% और चौथी तिमाही में 6.3% रहने की संभावना है।
विशेषज्ञों की राय: रेट कट नहीं होने पर कोई अचरज नहीं
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर विवेक अय्यर ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और पूर्व की कटौतियों के प्रभाव को देखने के लिए अभी समय की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सीमा शुल्क और टैरिफ को ध्यान में रखते हुए RBI पहले ही सतर्कता बरत चुका है, ऐसे में नीतिगत फैसले में और बदलाव तत्काल संभव नहीं दिखते।
REA इंडिया के सीईओ प्रवीण शर्मा ने कहा कि चूंकि इस साल पहले ही ब्याज दरों में 1% की कटौती हो चुकी है, इसलिए स्थिरता बनाए रखना तर्कसंगत कदम है। उन्होंने आगे कहा कि अब घर खरीदार अल्पकालिक ब्याज दरों से ज्यादा दीर्घकालिक स्थायित्व और आत्मविश्वास को प्राथमिकता दे रहे हैं। डेवलपर्स भी ग्राहकों को लुभाने के लिए फ्लेक्सी पेमेंट प्लान और विविध प्रोत्साहनों का सहारा ले रहे हैं।
कौन-कौन हैं एमपीसी के सदस्य?
आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में छह सदस्य होते हैं—तीन आरबीआई के प्रतिनिधि और तीन बाहरी विशेषज्ञ। इस बार की बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा, डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता और कार्यकारी निदेशक राजीव रंजन, तथा बाहरी सदस्य नागेश कुमार, सौरभ भट्टाचार्य और राम सिंह ने भाग लिया।
भारत सरकार ने आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति को 4% (±2%) के दायरे में बनाए रखने का लक्ष्य सौंपा है। इस साल फरवरी से खुदरा महंगाई दर इस दायरे के भीतर ही बनी हुई है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि दरों में और कटौती से पहले आरबीआई को और मजबूत आंकड़ों का इंतजार रहेगा।














