
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य नई पीढ़ी यानी स्टूडेंट्स और Gen-Z के हाथों में है। यही युवा न सिर्फ संविधान की रक्षा करेंगे बल्कि लोकतंत्र को मज़बूत बनाएंगे और वोट चोरी जैसे प्रयासों को भी नाकाम कर देंगे। राहुल गांधी ने दोहराया कि वह इस संघर्ष में युवाओं के साथ हर वक्त खड़े हैं।
हालांकि, उनके इस बयान को लेकर विपक्षी दलों के तीखे हमले तेज हो सकते हैं। वजह यह है कि हाल ही में नेपाल में Gen-Z का जो आंदोलन हुआ, उसने वहां की राजनीतिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया था।
नेपाल का उदाहरण और राहुल गांधी का संदर्भ
नेपाल में Gen-Z ने सोशल मीडिया पर बैन के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। यह विरोध धीरे-धीरे इतना उग्र हुआ कि हिंसा भड़क गई। इसमें 34 से अधिक लोगों की जान चली गई और हजारों घायल हो गए। आखिरकार इस दबाव के चलते वहां की सरकार को इस्तीफा देना पड़ा और अंतरिम सरकार का गठन हुआ। सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया। इतिहास में यह पहला मौका था जब Gen-Z का आंदोलन सत्ता परिवर्तन का कारण बना। ऐसे में राहुल गांधी द्वारा भारत के Gen-Z का जिक्र करना कई राजनीतिक मायनों से देखा जा रहा है।
देश के Yuva
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 18, 2025
देश के Students
देश की Gen Z
संविधान को बचाएंगे, लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वोट चोरी को रोकेंगे।
मैं उनके साथ हमेशा खड़ा हूं।
जय हिंद! pic.twitter.com/cLK6Tv6RpS
वोट चोरी पर राहुल का हमला तेज
राहुल गांधी पिछले कुछ दिनों से चुनाव प्रक्रिया और वोटिंग में धांधली को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। 18 सितंबर को उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि चुनाव आयोग मतदाताओं के नाम जानबूझकर डिलीट कर रहा है और इसके लिए फर्जी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राहुल ने यहां तक कहा कि अब खुद चुनाव आयोग के भीतर से लोग उन्हें यह जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।
चुनाव आयोग का पलटवार
राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। आयोग ने सभी दावों को पूरी तरह गलत और निराधार करार दिया। आयोग के अनुसार, किसी भी नागरिक का वोट ऑनलाइन हटाया ही नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने तथ्यों की गलत व्याख्या की है और एक भ्रामक धारणा बनाई है।














