प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित रेस कोर्स मस्जिद को खाली कराने और उसे गिराए जाने की कोशिशों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। भूमि एवं विकास कार्यालय (LNDO) ने मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए नोटिस जारी किया है, जिसमें परिसर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा कर रेस कोर्स मस्जिद के मामले में वक्फ संपत्ति की स्थिति और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मस्जिद वर्ष 1977 से गजट अधिसूचित वक्फ संपत्ति है, इसके बावजूद वक्फ बोर्ड ने विध्वंस के आदेश को चुनौती नहीं दी। ओवैसी ने यह भी सवाल किया कि जब इस संपत्ति को लेकर कार्रवाई की जा रही थी, तब संबंधित बोर्ड की ओर से विवाद को सुलझाने के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया गया।
ओवैसी ने किरेन रिजिजू से क्या मांग की?
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी पोस्ट में कहा कि रेस कोर्स मस्जिद के मामले में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है। उन्होंने वर्ष 1977 से मस्जिद के गजट अधिसूचित वक्फ संपत्ति होने का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बावजूद वक्फ बोर्ड ने विध्वंस के आदेश को चुनौती नहीं दी और न ही विवाद के समाधान के लिए कोई पहल की। ओवैसी ने वक्फ संशोधन अधिनियम का हवाला देते हुए दावा किया कि यह कानून भी मस्जिद को सुरक्षा प्रदान करता है, क्योंकि उनके अनुसार यह 'उपयोग के आधार पर वक्फ' की श्रेणी में आती है। उन्होंने कहा कि अतीत में पंजीकृत ऐसी सभी संपत्तियां सुरक्षित मानी जाती हैं। इसके बावजूद इस मामले में कोई प्रभावी प्रयास नहीं किया गया।
उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड के गठन को लेकर भी सवाल उठाया। ओवैसी के मुताबिक, वर्ष 2023 से दिल्ली वक्फ बोर्ड का गठन नहीं हुआ है, इसलिए इस मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री पर आती है। उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इस मामले में हस्तक्षेप कर सकते थे, लेकिन उनकी ओर से भी ऐसा नहीं किया गया।
छह दिनों के भीतर मस्जिद परिसर खाली करने का निर्देश
रेस कोर्स मस्जिद को लेकर जारी नोटिस में परिसर को छह दिनों के भीतर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। इस समयसीमा और संभावित कार्रवाई के विरोध में जमीयत उलमा-ए-हिंद ने भी केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के सामने अपनी मांगें रखी हैं। जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने किरेन रिजिजू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मस्जिद से जुड़े मामले में हस्तक्षेप करने और परिसर खाली कराने की कार्रवाई के संबंध में अपनी चिंताएं रखीं। मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने नमाजियों की आवाजाही सुचारु बनाए रखने की मांग भी की। इसके अलावा मस्जिद परिसर में बिजली और पानी की सुविधाएं बहाल करने का अनुरोध केंद्रीय मंत्री से किया गया। प्रतिनिधिमंडल का आग्रह था कि मस्जिद से संबंधित कार्रवाई के बीच नमाजियों की आवाजाही और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर भी ध्यान दिया जाए।
The race course masjid case needs @KirenRijiju’s urgent intervention. 1. Despite the masjid being a gazetted waqf property since 1977, the waqf board did not challenge the demolition order. Neither did it make any effort to resolve the issue 2. Even the Waqf Amendment Act protects the masjid since it’s ‘waqf by user.’ And all such properties registered in the past continue to be protected. But still no effort was made. 3. It’s the Minister’s job to resolve the matter since the Delhi Waqf Board hasn’t been constituted since 2023 but the CEO of the Board could have intervened, that also did not happen.
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) October 20, 2026
किरेन रिजिजू ने प्रतिनिधिमंडल को दिया आश्वासन
जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने रेस कोर्स मस्जिद से जुड़े मुद्दों पर केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के साथ चर्चा की। इस दौरान मस्जिद परिसर खाली करने के निर्देश, नमाजियों की आवाजाही और बिजली-पानी की सुविधाओं जैसे मुद्दे उठाए गए। किरेन रिजिजू ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुना और मामले में हर संभव प्रयास करने का आश्वासन दिया। हालांकि, उपलब्ध समाचार सामग्री में इस मामले पर आगे की कार्रवाई या किसी अंतिम निर्णय का विवरण नहीं दिया गया है।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन था शामिल?
रेस कोर्स मस्जिद के मामले में किरेन रिजिजू से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने किया। प्रतिनिधिमंडल में संगठन और दिल्ली प्रदेश से जुड़े कई पदाधिकारी भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों में मौलाना मुहम्मद कासिम नूरी, अध्यक्ष, जमीयत उलमा, दिल्ली प्रदेश; हाफिज़ यूसुफ़ आज़मी, नाज़िम-ए-तंजीम, जमीयत उलमा, दिल्ली प्रदेश; मौलाना हारून राही, दिल्ली प्रदेश; मौलाना कारी आरिफ क़ासमी, उपाध्यक्ष, जमीयत उलमा तथा रेस कोर्स मस्जिद के इमाम एवं खतीब; मौलाना ज़ियाउल्लाह क़ासमी, आयोजक, जमीयत उलमा-ए-हिंद; और मौलाना अरशद नदवी शामिल थे।
इस तरह रेस कोर्स मस्जिद को खाली कराने के नोटिस के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ संपत्ति की स्थिति और संबंधित संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री से हस्तक्षेप करने, नमाजियों की आवाजाही सुनिश्चित करने और बिजली-पानी की सुविधाएं बहाल कराने का अनुरोध किया है।













