
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लालकिले से ऐलान किया कि इस वर्ष के अंत तक भारतीय बाजार में भारत निर्मित पहली सेमीकंडक्टर चिप उपलब्ध हो जाएगी। 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी ने बताया कि देश में छह सेमीकंडक्टर इकाइयां पहले ही स्थापित हो चुकी हैं और चार नई इकाइयों को मंजूरी भी मिल गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने सेमीकंडक्टर के विचार को जन्म लेते ही समाप्त कर दिया था।
इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह प्रधानमंत्री का झूठा दावा है। उन्होंने याद दिलाया कि सेमीकंडक्टर कॉम्प्लेक्स लिमिटेड की स्थापना कांग्रेस सरकार के दौरान ही चंडीगढ़ में हुई थी और इसका संचालन 1983 में शुरू हो चुका था।
सेमीकंडक्टर तकनीक किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का आधार होती है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, घरेलू उपकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों सहित अनेक उत्पादों में इसका उपयोग अनिवार्य है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि देश में सेमीकंडक्टर पर विचार 50-60 साल पहले ही शुरू हो चुका था, लेकिन यह फाइलों में अटका रहा, जबकि अन्य देशों ने इस क्षेत्र में महारत हासिल कर ली और वैश्विक प्रभुत्व कायम किया।
मोदी ने कहा, "आज जो सेमीकंडक्टर विश्व शक्ति बन चुका है, उस पर विचार 50-60 साल पहले ही हुआ था, लेकिन फाइलों में अटका रहा। सेमीकंडक्टर के इस महत्वपूर्ण विचार की भ्रूण हत्या हुई। देश ने दशकों गंवा दिए, जबकि कई देशों ने इस क्षेत्र में अपनी ताकत मजबूत कर ली।"
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि वे लाल किले पर किसी सरकार की आलोचना करने नहीं आए हैं, बल्कि युवाओं को यह जानना जरूरी है कि भारत अब अतीत के बोझ से मुक्त होकर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में मिशन मोड में आगे बढ़ रहा है। भारत में सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित करने का पहला ज्ञात प्रयास अमेरिकी भौतिक विज्ञानी और उद्यमी रॉबर्ट नॉयस ने 1960 के दशक के अंत में किया था, जिन्होंने इंटेल की स्थापना गॉर्डन मूर के साथ की थी।
हाल ही में जारी सरकारी बयान के अनुसार, भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक दोगुना से भी अधिक बढ़कर 100-110 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस सप्ताह चार नई सेमीकंडक्टर इकाइयों को मंजूरी दी, जिनमें अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों इंटेल और लॉकहीड मार्टिन द्वारा समर्थित एक इकाई भी शामिल है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पीएम मोदी के भाषण की आलोचना करते हुए कहा कि लाल किले की प्राचीर से दिया गया भाषण “बासी, पाखंडी, नीरस और चिंताजनक” था। उन्होंने कहा कि विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और "सबका साथ, सबका विकास" जैसे नारों को सालों से दोहराया जा रहा है, लेकिन इनका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। जयराम रमेश ने यह भी जोर देकर कहा कि “मेड-इन-इंडिया” सेमीकंडक्टर चिप का वादा अनगिनत बार किया गया, हर बार धूमधाम से, लेकिन परिणाम शून्य रहे। उनका कहना है कि भारत का पहला सेमीकंडक्टर कॉम्प्लेक्स 1980 के दशक की शुरुआत में ही चंडीगढ़ में स्थापित हो चुका था, जिससे मोदी का दावा झूठा साबित होता है।














