संसद के मॉनसून सत्र के छठे दिन यानी सोमवार, 28 जुलाई को जब 'ऑपरेशन सिंदूर' पर बहस छिड़ी, तो कांग्रेस की ओर से दो प्रमुख चेहरे—शशि थरूर और चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी—चुपचाप बैठे रहे। पार्टी ने उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया, जिससे नाराज मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर अप्रत्यक्ष रूप से अपनी ही पार्टी को कटघरे में खड़ा कर दिया।
मनीष तिवारी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने गीत के अंदाज़ में अपने मन की बात कही। यह पोस्ट सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया, और पार्टी की आंतरिक रणनीति पर सवाल उठने लगे।
है प्रीत जहां की रीत सदा
मैं गीत वहां के गाता हूं
भारत का रहने वाला हूं
भारत की बात सुनाता हूं
Hai preet jahaan ki reet sada
Main geet wahaan ke gaata hoon
Bharat ka rehne waala hoon
Bharat ki baat sunata hoon
- Jai Hind
'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक खबर के अनुसार, कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने खुलासा किया कि यह निर्णय जानबूझकर लिया गया था। पार्टी ने नए चेहरों को प्राथमिकता दी ताकि संसद में एक आक्रामक विपक्ष की छवि पेश की जा सके। इस सूत्र के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता था कि ऐसे नेता—जैसे थरूर और तिवारी—जो पहले सरकार के कुछ कदमों पर सहमति जता चुके हैं, मंच पर आएं।
यह भी कहा गया कि कांग्रेस नेतृत्व चाहता था कि वे ही सांसद बहस में भाग लें, जो पूरी तरह पार्टी लाइन के अनुरूप सरकार की तीखी आलोचना करें और विपक्ष की ताकत को धार दें। इसी रणनीति के तहत अनुभवी और स्वतंत्र विचार रखने वाले नेताओं को दरकिनार किया गया।
यह घटनाक्रम न केवल कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पार्टी किस तरह से संसद में अपनी आवाज को नियंत्रित और निर्देशित करने की कोशिश कर रही है। मनीष तिवारी का यह अप्रत्यक्ष विरोध पार्टी के भीतर मतभेदों की एक और झलक देता है, जो आने वाले दिनों में और उभर सकते हैं।














