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ISRO के निजीकरण पर कर्मचारियों की चिंता बढ़ी, 9 संघों ने अध्यक्ष से मांगा भविष्य की भूमिका पर स्पष्ट जवाब

ISRO के 9 कर्मचारी संघों ने निजीकरण नीति, PSLV-LVM3 उत्पादन, नौकरियों, प्रमोशन और रिसर्च पर असर को लेकर अध्यक्ष वी. नारायणन से स्पष्टीकरण मांगा।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sun, 06 Sep 2026 10:10:49

ISRO के निजीकरण पर कर्मचारियों की चिंता बढ़ी, 9 संघों ने अध्यक्ष से मांगा भविष्य की भूमिका पर स्पष्ट जवाब

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को लेकर कर्मचारियों के बीच चिंता सामने आई है। देशभर के अलग-अलग इसरो केंद्रों से जुड़े नौ कर्मचारी संघों ने संयुक्त रूप से इसरो अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन को पत्र भेजकर संगठन के मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल काम निजी संस्थाओं को सौंपे जाने की नीति पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। यह पत्र 4 सितंबर को भेजा गया।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोले जाने के करीब छह साल बाद भी इसरो की भविष्य की भूमिका और मौजूदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है। इसी वजह से वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक कर्मचारियों के साथ उनके परिवारों के बीच भी असुरक्षा और तनाव की स्थिति बन रही है।

इन 9 कर्मचारी संगठनों ने उठाई आवाज

संयुक्त पत्र पर इसरो के विभिन्न प्रमुख केंद्रों से जुड़े नौ कर्मचारी संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें इसरो स्टाफ एसोसिएशन, शार एम्प्लॉइज एसोसिएशन, इसैक एम्प्लॉइज एसोसिएशन, इसरो स्टाफ एसोसिएशन-एलपीएससी, इसरो स्टाफ एसोसिएशन-बीबीयू, एनआरएसए एम्प्लॉइज यूनियन, स्पेस एम्प्लॉइज एसोसिएशन-बीबीयू, इसरो स्टाफ एसोसिएशन-आईपीआरसी और सैक एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन शामिल हैं।

इन संगठनों का प्रतिनिधित्व क्रमशः श्रीहरिकोटा, बेंगलुरु, तिरुवनंतपुरम, अहमदाबाद, महेंद्रगिरि और अन्य इसरो केंद्रों से जुड़ी कर्मचारी इकाइयों द्वारा किया जाता है।

'इन-स्पेस' चेयरमैन के बयान के बाद बढ़ी चिंता

कर्मचारी संघों की चिंता की एक प्रमुख वजह 'इन-स्पेस' के चेयरमैन पवन कुमार गोयनका का हालिया बयान बताया गया है। एक कार्यक्रम में गोयनका ने कहा था कि भविष्य में इसरो किसी भी लॉन्च व्हीकल यानी रॉकेट का निर्माण नहीं करेगा और यह जिम्मेदारी निजी क्षेत्र या सार्वजनिक उपक्रमों को दी जाएगी।

संघों के अनुसार, स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल यानी SSLV का ट्रांसफर इस दिशा में शुरुआत है। इसके बाद PSLV और LVM3 जैसे प्रमुख लॉन्च व्हीकलों के उत्पादन को भी निजी क्षेत्र को सौंपे जाने की तैयारी को लेकर कर्मचारियों में सवाल पैदा हुए हैं।

कर्मचारी संगठनों ने पत्र में यह भी कहा है कि इसरो की करीब 120 तकनीकों को पहले ही निजी क्षेत्र में ट्रांसफर किया जा चुका है। इसके अलावा तमिलनाडु के कुलशेखरपट्टिनम में विकसित हो रहे नए स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स जैसे बुनियादी ढांचे को भी निजी कंपनियों के लिए खोला जा रहा है।

कर्मचारियों को किन बातों की चिंता?

कर्मचारी संघों का तर्क है कि रॉकेट और सैटेलाइट का निर्माण केवल ठेकेदारी या असेंबली से जुड़ा काम नहीं है। संघों ने आशंका जताई है कि अगर ऐसे कार्यों को लगातार बाहरी संस्थाओं को सौंपा जाता है, तो इसका असर इसरो के भीतर होने वाली रिसर्च पर पड़ सकता है। साथ ही स्वीकृत पदों में कमी आने और भविष्य में सरकारी भर्तियों के अवसर सीमित होने की चिंता भी जताई गई है।

मौजूदा कर्मचारियों के लिए भी प्रमोशन और कौशल विकास के अवसर कम होने की आशंका व्यक्त की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि जब संगठन के पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल कार्यों का बड़ा हिस्सा बाहर जाएगा, तो इसका सीधा असर उनके करियर के अवसरों पर पड़ सकता है।

सरकार से नीति और कर्मचारियों के अधिकारों पर स्पष्टीकरण की मांग

कर्मचारी संघों ने इसरो अध्यक्ष से मांग की है कि सरकार की निजीकरण नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए। इसके साथ ही उन्होंने इस नीति के कानूनी आधार और मौजूदा कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा के बारे में भी जल्द आधिकारिक जानकारी देने की मांग की है।

कर्मचारी संगठनों के पत्र का मुख्य सवाल यही है कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के बीच इसरो की भविष्य की जिम्मेदारियां क्या होंगी और संगठन में काम कर रहे कर्मचारियों की भूमिका किस तरह सुरक्षित रखी जाएगी। आधिकारिक रोडमैप स्पष्ट नहीं होने की स्थिति में संघों ने कर्मचारियों के बीच बनी अनिश्चितता को दूर करने की मांग उठाई है।

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