
रेलवे अब टिकट कैंसिलेशन को लेकर बड़ी राहत देने की तैयारी में जुटा है, जो लाखों यात्रियों के लिए किसी अच्छी खबर से कम नहीं। फिलहाल अगर आपने कोई टिकट बुक किया है और वह वेटिंग लिस्ट में रहा, तो टिकट कैंसल होने पर पूरा पैसा नहीं लौटता—यह बात हर रेल यात्री को अंदर से खटकती है। इसकी वजह है रेलवे द्वारा ली जाने वाली ‘क्लर्क फीस’, जो बिना कन्फर्म टिकट मिलने के दुख में और नमक छिड़क देती है। यह चार्ज विभिन्न क्लास के हिसाब से 30 से 60 रुपये तक होता है, जो कई बार यात्रियों को भावनात्मक रूप से भी खलता है।
रेलवे अब इस 'अनावश्यक' लगने वाले शुल्क को खत्म करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है ताकि मुसाफिरों को न केवल जेब की राहत मिले, बल्कि उनके अनुभव में भी सकारात्मकता जुड़ सके। अगर यह प्रस्ताव अमल में आया, तो वेटिंग लिस्ट के टिकट कन्फर्म न होने की स्थिति में यात्रियों को पूरी राशि रिफंड मिल सकती है, जिससे उन्हें एक बड़ी राहत महसूस होगी।
टिकट कैंसिलेशन पर लगने वाले चार्ज को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। खासकर उन यात्रियों के मन में यह सवाल रहता है, जिन्होंने टिकट खुद नहीं बल्कि सिस्टम द्वारा कैंसल करवाया हो—तो उनसे चार्ज क्यों लिया जाए? अब रेलवे के समक्ष यह प्रस्ताव रखा गया है और इसमें यात्रियों की भावनाएं भी झलकती हैं। मौजूदा समय में 2S क्लास का कैंसिल टिकट ₹30, स्लीपर क्लास व थर्ड एसी के टिकट पर ₹60 प्लस जीएसटी का कट लगता है।
यह चार्ज तब भी लगता है जब बुकिंग सीधे IRCTC के पोर्टल से की गई हो और टिकट की कैंसलेशन प्रक्रिया स्वतः हो। वेटिंग टिकट के कन्फर्म न होने से ऑटोमेटेड कैंसलेशन होता है और यात्री को कुछ कटौती के बाद रकम लौटाई जाती है। यह पूरी प्रक्रिया यात्रियों को आर्थिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी असहज कर देती है।
ध्यान देने वाली बात है कि वित्तीय वर्ष 2025 में रेलवे ने रिकॉर्ड 2.7 लाख करोड़ रुपये की कमाई की है। इसमें मालगाड़ियों से 1.75 लाख करोड़ और यात्री ट्रेनों से भारी आय दर्ज की गई है। रेलवे इसे यात्रियों के भरोसे की मिसाल मान रहा है, लेकिन साथ ही साथ छोटे-छोटे मुद्दों पर काम करना भी जरूरी है।
6000 करोड़ रुपये सिर्फ कैंसलेशन चार्ज से!
एक RTI के अनुसार, रेलवे ने 2020 से 2023 के बीच कैंसलेशन चार्ज से ही लगभग 6,000 करोड़ रुपये की कमाई की थी। इस आंकड़े ने कई यात्रियों को चौंकाया था और यही वजह रही कि वेटिंग लिस्ट वाले टिकट कैंसिलेशन पर चार्ज को लेकर कई बार सवाल उठे। अगर रेलवे अब इसे खत्म करता है, तो यह केवल पैसे की नहीं, बल्कि संवेदनशीलता की भी जीत होगी।














