
भारत और अमेरिका के बीच हालिया दिनों में द्विपक्षीय रिश्तों में खिंचाव देखा गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूस से तेल आयात करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए टैरिफ में बढ़ोतरी की धमकी दी थी। ऐसे माहौल में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल मंगलवार, 5 अगस्त को रूस की राजधानी मास्को पहुंचे हैं।
‘द मॉस्को टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र, खासकर तेल आपूर्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हो सकता है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है, और वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर रणनीतिक निर्णय ले रहा है।
पुतिन से मिलेंगे डोभाल, भारत की रणनीति होगी पेश
रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, अजीत डोभाल आगामी 7 अगस्त को रूसी शीर्ष अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें कर सकते हैं। इन बैठकों में भारत-रूस के बीच तेल व्यापार पर विस्तार से चर्चा की संभावना है।
बताया जा रहा है कि डोभाल, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समक्ष भारत की ऊर्जा नीति और रणनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से रखेंगे। इस दौरान यह भी उम्मीद की जा रही है कि भारत रूस से तेल की खरीद में अधिक छूट की मांग करेगा। खास बात यह है कि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी अगले सप्ताह रूस की यात्रा पर जा सकते हैं, जिससे इस दौरे की रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
ट्रंप की चेतावनी: भारत पर बढ़ सकते हैं आयात शुल्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और रूस के बीच चल रहे तेल व्यापार को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उनका आरोप है कि भारत रूस से तेल खरीद कर अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध को सहयोग दे रहा है, क्योंकि रूस उस धन का उपयोग अपने सैन्य अभियानों में करता है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि भारत ने रूस से तेल आयात जारी रखा, तो उस पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा। फिलहाल अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया है। इसके साथ ही भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौता लंबित है, जिसे लेकर चर्चाएं तो हो रही हैं लेकिन अब तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
रूस से मिल सकती है भारत को राहत
भारत ऊर्जा आयात के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है — चीन के बाद। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 35 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से खरीदता है।
पश्चिमी देशों के लगातार दबाव के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। अमेरिका द्वारा टैरिफ की धमकी के बीच रूस की ओर से भारत को मूल्य में रियायत (डिस्काउंट) मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर यह डील सफल होती है, तो भारत को तेल आपूर्ति में राहत मिलने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय दबावों का संतुलित जवाब भी मिल सकता है।














