घर में कभी दरवाजे का हैंडल पकड़ते समय, कभी नल छूने पर और कभी किसी दूसरे व्यक्ति से हाथ मिलाते हुए अचानक उंगली में हल्का सा झटका महसूस होता है। यह अनुभव इतना अचानक होता है कि कई बार समझ नहीं आता कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। खासकर सर्दियों में या जब मौसम बहुत सूखा होता है, तब इस तरह की शिकायत अधिक देखने को मिलती है। हालांकि, हर बार करंट जैसा महसूस होने का मतलब यह नहीं है कि किसी चीज में बिजली का करंट दौड़ रहा है। कई मामलों में इसकी वजह स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी यानी स्थैतिक बिजली होती है। शरीर या किसी वस्तु की सतह पर इलेक्ट्रिक चार्ज जमा होने के बाद जब वह किसी दूसरी सतह के संपर्क में आता है, तो चार्ज तेजी से स्थानांतरित होता है। इसी प्रक्रिया के दौरान कुछ पल के लिए चुभन या हल्के झटके जैसा एहसास होता है।
स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी क्या होती है?
स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी को समझने के लिए परमाणु की संरचना के बारे में जानना जरूरी है। ऑस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी में कंप्यूटेशनल इंटेलिजेंस की एसोसिएट प्रोफेसर नियूशा शफियाबादी के अनुसार, हर पदार्थ परमाणुओं से मिलकर बना होता है। परमाणु के केंद्र में न्यूक्लियस होता है, जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन मौजूद रहते हैं। इसके आसपास इलेक्ट्रॉन घूमते हैं। इलेक्ट्रॉन पर नेगेटिव यानी ऋणात्मक चार्ज होता है, जबकि प्रोटॉन पॉजिटिव यानी धनात्मक चार्ज रखते हैं। सामान्य स्थिति में किसी परमाणु में प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या बराबर होती है। इस कारण उसका कुल इलेक्ट्रिक चार्ज संतुलित रहता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में इलेक्ट्रॉन एक सतह से दूसरी सतह पर स्थानांतरित हो सकते हैं। जब किसी सतह पर इलेक्ट्रॉन अधिक जमा हो जाते हैं, तो वह नेगेटिव चार्ज वाली हो सकती है। इसके विपरीत, इलेक्ट्रॉनों की कमी होने पर दूसरी सतह पर पॉजिटिव चार्ज रह सकता है। इस तरह इलेक्ट्रिक चार्ज का संतुलन बिगड़ जाता है और स्थैतिक बिजली पैदा होती है।
जब यह जमा हुआ चार्ज अचानक दूसरी सतह पर पहुंचता है, तो हमें हल्का झटका महसूस हो सकता है। आमतौर पर दरवाजे का हैंडल छूने या किसी व्यक्ति के संपर्क में आने पर होने वाला ऐसा अनुभव इसी वजह से होता है।
कपड़े और जूते भी बन सकते हैं स्टैटिक शॉक की वजह
शरीर पर इलेक्ट्रिक चार्ज जमा होने की एक प्रमुख वजह घर्षण है। जब दो अलग-अलग सतहें आपस में रगड़ती हैं, तो उनके बीच इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण हो सकता है। इस प्रक्रिया में शरीर या कपड़ों पर चार्ज जमा होने की स्थिति बन जाती है।
उदाहरण के लिए, अगर आप रबर की सोल वाले जूते पहनकर कारपेट पर चलते हैं, तो जूतों और कारपेट के बीच घर्षण होता है। इससे इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण हो सकता है। रबर बिजली का खराब चालक यानी इंसुलेटर होता है, इसलिए शरीर पर जमा चार्ज आसानी से जमीन तक नहीं पहुंच पाता। नतीजतन, कुछ समय तक यह चार्ज शरीर पर बना रह सकता है।
कपड़े बदलते समय भी ऐसा हो सकता है। स्वेटर उतारने के दौरान कपड़े और शरीर के बीच घर्षण होता है, जिससे स्टैटिक चार्ज पैदा हो सकता है। इसी तरह बालों में कंघी करने पर भी इलेक्ट्रिक चार्ज जमा होने की स्थिति बन सकती है।
कुछ पालतू जानवरों के बालों में भी स्थैतिक बिजली जमा हो सकती है। ऐसे में बिल्ली या कुत्ते को सहलाते समय कभी-कभी हल्का सा झटका महसूस होना संभव है। इसलिए अगर कपड़े बदलने, कारपेट पर चलने या बालों में कंघी करने के बाद किसी धातु की चीज को छूते ही चुभन महसूस होती है, तो इसकी वजह शरीर पर जमा स्थैतिक चार्ज हो सकता है।
दरवाजे का हैंडल छूते ही झटका क्यों लगता है?
आपके शरीर पर इलेक्ट्रिक चार्ज जमा है और आप अचानक किसी धातु की वस्तु को छू लेते हैं, तो चार्ज तेजी से दूसरी सतह पर जा सकता है। इसकी वजह यह है कि धातु बिजली की अच्छी चालक होती है और इलेक्ट्रिक चार्ज को आसानी से गुजरने का रास्ता देती है।
जब जमा हुआ चार्ज बहुत कम समय में शरीर से दूसरी सतह की ओर स्थानांतरित होता है, तो उंगली में सुई चुभने या हल्का करंट लगने जैसा एहसास होता है। कुछ मामलों में इस दौरान बेहद छोटी चिंगारी भी दिखाई दे सकती है।
ऐसी स्थिति में दरवाजे का हैंडल जरूरी नहीं कि खुद बिजली का झटका दे रहा हो। कई बार शरीर पर पहले से जमा स्टैटिक चार्ज ही धातु के संपर्क में आते ही डिस्चार्ज होता है। इसी कारण हैंडल छूते समय अचानक झटका महसूस होता है। हालांकि, अगर किसी धातु के हैंडल, नल या दूसरे उपकरण को छूने पर बार-बार झटका लगता है, खासकर जब यह अनुभव किसी एक खास वस्तु से जुड़ा हो, तो इसे हर बार स्थैतिक बिजली मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वास्तविक बिजली के रिसाव की संभावना को भी जांचना जरूरी है।
सर्दियों में करंट जैसा झटका ज्यादा क्यों लगता है?
मौसम में मौजूद नमी का स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी पर असर पड़ता है। ठंडी और सूखी हवा में इलेक्ट्रिक चार्ज आसानी से जमा हो सकता है और लंबे समय तक सतह पर बना रह सकता है। इसके मुकाबले हवा में नमी अधिक होने पर चार्ज को धीरे-धीरे फैलने या खत्म होने में मदद मिलती है। यही वजह है कि सर्दियों में या ऐसे कमरों में, जहां हवा बहुत शुष्क रहती है, दरवाजे के हैंडल, नल और अन्य धातु की चीजों को छूने पर बार-बार हल्का झटका महसूस हो सकता है। इस अनुभव पर सिर्फ मौसम ही नहीं, बल्कि आपके कपड़ों का प्रकार, जूतों की सोल, कमरे में मौजूद सतहें और त्वचा की नमी भी असर डालती हैं। इसलिए एक ही घर में किसी व्यक्ति को बार-बार स्टैटिक शॉक महसूस हो सकता है, जबकि दूसरे को ऐसा अनुभव कम हो।
अगर घर में बार-बार स्थैतिक बिजली के झटके महसूस हो रहे हैं, तो कमरे की नमी बढ़ाने से मदद मिल सकती है। इसके लिए ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। त्वचा को मॉइस्चराइज रखना भी उपयोगी हो सकता है, क्योंकि बहुत सूखी त्वचा के साथ स्टैटिक चार्ज से जुड़ी परेशानी अधिक महसूस हो सकती है।














